Explainer: राहुल गांधी की शिक्षा यात्रा, क्यों चुने गए शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के ये चार बड़े केंद्र?
कोटा: भारत की कोचिंग राजधानी दिलचस्प बात यह है कि यात्रा के लिए चुने गए ये चारों शहर केवल राजनीतिक महत्व नहीं रखते, बल्कि भारत
कोटा: भारत की कोचिंग राजधानी दिलचस्प बात यह है कि यात्रा के लिए चुने गए ये चारों शहर केवल राजनीतिक महत्व नहीं रखते, बल्कि भारत की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्र आंदोलनों के प्रमुख केंद्र भी रहे हैं। इन शहरों का अपना अलग शैक्षिक इतिहास है और प्रत्येक शहर भारत के लाखों छात्रों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। आइये इन शहरों और शिक्षा से इनके रिश्ते को विस्तार से जानते हैं...भारत में कोचिंग उद्योग का सबसे बड़ा प्रतीक राजस्थान का कोटा शहर रहा है।
आज जिस कोटा को देश की कोचिंग राजधानी कहा जाता है, उसकी कहानी 1985 में शुरू हुई थी। उस समय जे.के. सिंथेटिक्स में इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले वी.के. बंसल ने अपने घर से छात्रों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत में वे सातवीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाते थे, बाद में दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को भी पढ़ाने लगे।
1985 में उनके एक छात्र ने IIT-JEE परीक्षा पास कर ली। इस सफलता ने वी.के. बंसल को एक नई दिशा दिखाई। उन्होंने बंसल क्लासेज की स्थापना की, जो आगे चलकर देश के सबसे बड़े कोचिंग संस्थानों में से एक बन गया।इसने कोटा में एक नई शैक्षणिक अर्थव्यवस्था को जन्म दिया। देखते ही देखते शहर में दर्जनों बड़े संस्थान खड़े हो गए और कोटा इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का राष्ट्रीय केंद्र बन गया।
कोटा जिला प्रशासन और विभिन्न शिक्षा रिपोर्टों के अनुसार हर वर्ष करीब 2 से 2.5 लाख छात्र जेईई और नीट की तैयारी के लिए यहां पहुंचते हैं।
