Lucknow, India

'भारत में पहली बार ऐसी सत्ता आई है जो पूर्णत:भारतीय है', जागरण भारत एजुकेशन कॉन्क्लेव में बोले सुधांशु त्रिवेदी

Published 22 May 2026 · world

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। Jagran Bharat Education Conclave 2026 में भारतीय जनता पार्टी की राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 16 मई 2014 को जब बीजेपी को बहुमत मिला, तो 18 मई 2014 को संडे गार्जियन ने एक आर्टिकल लिखा, जिसमें कहा गया कि भारत में पहली बार ऐसी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। Jagran Bharat Education Conclave 2026 में भारतीय जनता पार्टी की राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 16 मई 2014 को जब बीजेपी को बहुमत मिला, तो 18 मई 2014 को संडे गार्जियन ने एक आर्टिकल लिखा, जिसमें कहा गया कि भारत में पहली बार ऐसी सत्ता आई है जो पूर्णत:भारतीय है। उन्होंने कहा कि हमें किश्तों में आजादी मिली। 15 अगस्त 1947 के हम अधूरे आजाद हुए। आजादी के लंबे समय तक हमारी तीनों सेनाओं के प्रमुख अंग्रेज ही थे। 1977 कर सिविल सेवा परीक्षाएं केवल अंग्रेजी भाषा में ही होती थीं। अटल जी सरकार से पहले बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था, क्योंकि शाम 5 बजे लंदन में काम-काज शुरू होता है।

अटल जी ने इस औपनिवेशिक परंपरा को तोड़ा और पहली बार 27 फरवरी 1999 को सुबह 11 बजे पेश किया गया। बजट की तारीख और समय बदलकर गुलामी की परंपरा को तोड़ा- सुधांशु त्रिवेदी सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि मोदी सरकार के आने से के बाद 2016 तक बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता था, लेकिन 2017 ये परंपरा बदल गई और निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2017 को पहली बार 1 फरवरी को देश के बजट पेश किया। धीरे-धीरे हम गुलामी की पंरपराओं के बाहर आ रहे हैं। अटल जी के दौर से शुरू होकर मोदी सरकार के 12 सालों में हम काफी आगे बढ़ चुके हैं।

जो बात ChatGPT को नहीं पता, लेकिन मुझे पता है- सुधांशु त्रिवेदी सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन से एक बार पूछा गया था कि क्या ऐसा कोई सवाल है, जिसका जवाब ChatGPT को न पता हो, तब सैम ऑल्टमैन ने कहा, 'आत्मा और ब्रह्म में पूर्ण संतुलन है या नहीं?' ये ChatGPT को नहीं पता, लेकिन मुझे पता है। सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा, ये बात भी भारतीय वेदों से निकली है। खबरें और भी सोमवार के बाद मंगलवार ही क्यों आया? दैनिक जागरण भारत एजुकेशन कॉन्क्लेव में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'सप्ताह से हफ्ता शब्द आया। हफ्ता पर्शियन शब्द है और सप्ताह संस्कृत से आया है।

हमारे यहां एक श्लोक है, "ब्रह्मा मुरारीस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशि भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहाः शांतिकरा भवन्तु॥" इससे साबित होता है कि सप्ताह के दिनों के नाम जो आज संडे, मंडे के नाम से जाने जाते हैं, हमारे वेदों में शताब्दियों पहले से हैं। और अक्सर हम लोग पूजा पाठ में इनका इस्तेमाल करते हैं। इससे भी साबित होता है कि हम विश्वगुरू पहले तो थे ही, बल्कि आज भी हैं।'

Read full story on TheBriefWire

Loading…