Lucknow, India

नहीं बढ़ेगी आपकी EMI, रेपो रेट बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहा RBI

Published 22 May 2026 · finance

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आरबीआई अभी ब्याज दरों को बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय बैंक रुपए की गिरावट को रोकने के लिए आपातकालीन बैठक करने या रेपो रेट में बढ़ोतरी करने पर फिलहाल विचार नहीं कर रहा है। गले महीने की शुरुआत में मौद्रिक नीति

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आरबीआई अभी ब्याज दरों को बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय बैंक रुपए की गिरावट को रोकने के लिए आपातकालीन बैठक करने या रेपो रेट में बढ़ोतरी करने पर फिलहाल विचार नहीं कर रहा है। गले महीने की शुरुआत में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक होने वाली है, जिसमें ब्याज दरों पर फैसला होगा। कुछ एजेंसियों ने अनुमान लगाया था कि पश्चिम एशिया के विवाद के कारण केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, लेकिन विश्वस्त सूत्र इससे इनकार कर रहे हैं। आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में नहीं आरबीआई मानता है कि मौजूदा हालात चिंताजनक है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के तमाम पहलुओं को देखते हुए अभी इंताजर करने की नीति ज्यादा सही रहेगी।

अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय बैंक रुपए की रक्षा के लिए आक्रामक कदम उठाने के मूड में नहीं है। हाल ही में कई प्रमुख अर्थविदों ने यह अपील की है कि डालर के मुकाबले रुपये मे हो रही गिरावट से परेशान हो कर जबरदस्ती रुपये को थामने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यह बात नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष अरविंद पानागढ़िया, आइएमएफ की पूर्व प्रमुख अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ भी शामिल हैं। खबरें और भी इनका पक्ष है कि रुपये को थामने के लिए आरबीआइ को अपनी विदेशी मुद्रा भंडार को खर्च करने की जरूरत नहीं है। इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि आरबीआइ रुपये को लेकर किसी लक्ष्य को लेकर अपनी नीति नहीं बना रही है।

ब्याज दरों के बारे में इनका कहना मानना है कि वर्तमान में मुद्रास्फीति 4.8 प्रतिशत है, जबकि चालू वित्त वर्ष का लक्ष्य 4.6 प्रतिशत है। आरबीआई की हालिया मासिक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डालर प्रति बैरल रहती है तो सीपीआई मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत तक जा सकती है और जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रुपए की गिरावट पर तत्काल हस्तक्षेप नहीं महंगाई की यह दर सालाना लक्ष्य से बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसे में कम से कम एक-दो तिमाहियों तक स्थिति का जायजा लिया जाएगा, उसके बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा। यह भी सनद रहे कि आरबीआई गवर्नर ने 18 मई को आईएमएफ में दिए गए अपने भाषण में महंगाई दर को लेकर तत्काल किसी तरह का फैसला नहीं करने का संकेत दिया है।

आरबीआई ने वर्ष 2025 की शुरुआत में लगातार कई बार रेपो रेट में कटौती करके ब्याज दरों को कम करने की कोशिश की थी। इससे होम लोन और ऑटो लोन सस्ते हुए, जिसका सकारात्मक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा। लेकिन पश्चिम एशिया विवाद के बाद पेट्रो उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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