मोनोक्रोटोफॉस: 112 देशों में बैन ये 'रेड लेबल' जहर, भारत में कैसे हो रहा इस्तेमाल?
यह कहानी सिर्फ एक कीटनाशक की नहीं है. यह दास्तान है एग्रो केमिकल कंपनियों की उस अंधी हवस की, जिसने चंद रुपयों के मुनाफे के
यह कहानी सिर्फ एक कीटनाशक की नहीं है. यह दास्तान है एग्रो केमिकल कंपनियों की उस अंधी हवस की, जिसने चंद रुपयों के मुनाफे के लिए भारतीय खेतों को मसान बना दिया है. इसके समानांतर एक सच उन नीति निर्माताओं की सेटिंग और सुस्ती का भी है, जो एसी कमरों में बैठकर फाइलों के पन्ने पलटते रहे और उधर गांवों में किसान बीमार पड़ते रहे.
बहरहाल, 'जहर के खिलाफ जंग' सीरीज में आज मोनोक्रोटोफॉस की बात करेंगे, जो एक खतरनाक इन्सेक्टिसाइड है. जब दुनिया के 112 देश इस 'रेड लेबल'
केमिकल को अपने मुल्क की मिट्टी से खदेड़ चुके थे, तब हमारे देश के नीति निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर 'कमेटी-कमेटी' का खेल खेल रहे
थे. आइए, इसके जन्म से लेकर इसके खूनी इतिहास और सरकार की कथित मजबूरियों तक के इस पूरे खेल की परतें खोलते हैं.
