Lucknow, India

असम विधानसभा में संस्कृत की गूंज: 17 विधायकों ने ली शपथ, सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने की सरहाना

Published 21 May 2026 · politics

बहुभाषी असम की राजनीति में ऐतिहासिक बन गया, जब गुरुवार को षोडश असम विधानसभा में 17 नवनिर्वाचित विधायकों ने संस्कृत में शपथ ग्रहण की। विधानसभा के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों ने संस्कृत को शपथ की भाषा के रूप में चुना। लंबे समय से ‘मृतप्राय’ मानी

बहुभाषी असम की राजनीति में ऐतिहासिक बन गया, जब गुरुवार को षोडश असम विधानसभा में 17 नवनिर्वाचित विधायकों ने संस्कृत में शपथ ग्रहण की। विधानसभा के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों ने संस्कृत को शपथ की भाषा के रूप में चुना। लंबे समय से ‘मृतप्राय’ मानी जाने वाली इस प्राचीन भाषा की गूंज विधानसभा तक पहुंचना सांस्कृतिक पुनर्जागरण के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कई विधायकों ने ली संस्कृत में शपथ इन विधायकों ने ली संस्कृत में शपथ संस्कृत में शपथ लेने वाले विधायकों में विश्वजीत दैमारी, बिमल बोरा, जयंता मल्ल बरुआ, भवेश कलिता, पृथ्वीराज राभा, डॉ. परमानंद राजबंशी, संजय किशान, डॉ. मृदुल कुमार दत्ता, अमिय कांति दास, विजय कुमार गुप्ता, नीलिमा देवी, डॉ. मिलन दास, मयूर बरगोहाईं, विक्टर कुमार दास, कृष्ण कमल तांती, राजदीप ग्वाला और पवित्र राभा शामिल हैं। इनमें बोडो, राभा, कूच-राजबंशी, अहोम और चाय जनजाति समुदायों से आने वाले विधायक भी शामिल हैं।

वैश्वीकरण और तकनीकी बदलावों के बीच पारंपरिक भाषा संस्कृत के पुनर्प्रतिष्ठा की दिशा में महत्वपूर्ण राजनीतिक और सांस्कृतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह केवल शपथ की भाषा का चयन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक पहचान के प्रति सार्वजनिक प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है। खासतौर पर ऐसे समय में, जब वैश्वीकरण और तकनीकी बदलावों के बीच पारंपरिक भाषाओं के अस्तित्व पर बहस तेज है, असम विधानसभा का यह दृश्य संस्कृत के पुनर्स्मरण और पुनर्प्रतिष्ठा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि सार्वजनिक मंचों पर भारतीय भाषाओं को महत्व देंगे, तो इससे उनके संरक्षण और प्रचार-प्रसार को नई ऊर्जा मिलेगी। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में संस्कृत के प्रचार-प्रसार को लेकर विभिन्न पहलें की गई हैं। हालांकि किसी विधानसभा में इतनी बड़ी संख्या में विधायकों द्वारा संस्कृत में शपथ ग्रहण करना अपने आप में दुर्लभ और प्रतीकात्मक घटना माना जा रहा है।

संस्कृत भारती, असम प्रांत के संगठन मंत्री भवेन सैकिया ने बताया कि इसके संस्कृत भारती असम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा असम विधानसभा में 17 विधायकों द्वारा संस्कृत में शपथ लेना अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चल रहा अभ्यास और जागरूकता अभियान था। उन्होंने बताया कि संस्कृत भारती की सुदष्णा भट्टाचार्य, अध्यक्षा संस्कृत भारती और तपन दास, कोषाध्यक्ष संस्कृत भारती और पंकज शर्मा की बहुत मेहनत है। उन्होंने बताया कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दिलीप सैकिया भी इस पहल के समर्थक थे और उन्होंने अधिक से अधिक विधायकों को संस्कृत अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। भवेन सैकिया ने बताया कि असम के कई पूर्व मंत्र (पिछली सरकार में शिक्षा मंत्री) रनेज पेगु, कोरस्पेंडस से संस्कृत की पढ़ाई कर रहे हैं। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भवेत कलिता और पिछली सरकार में मंत्री जयंत मल्ल बरूआ की पढ़ाई कर रहे हैं। फोन की घंटी थम नहीं रही नीलिमा मंगलदै से भाजपा विधायक नीलिमा देवी ने संस्कृत में शपथ लेने के बाद अपनी खुशी व्यक्त करते हुए अमर उजाला से कहा कि सुबह से उन्हें लगातार बधाइयों के फोन आ रहे हैं।

उन्होंने कहा, जब से मैंने संस्कृत में शपथ ली है, उसके बाद से फोन की घंटी थम ही नहीं रही। लोगों का स्नेह और प्रतिक्रिया देखकर मुझे खुद पर गर्व महसूस हो रहा है। नीलिमा देवी ने कहा कि लोग अक्सर संस्कृत को केवल पूजा-पाठ और ग्रंथों की भाषा मानते हैं, जबकि यह उससे कहीं अधिक व्यापक और समृद्ध भाषा है। उन्होंने कहा, संस्कृत किसी एक जाति या वर्ग की भाषा नहीं है। इसे सभी लोग बोल सकते हैं। यह हमारी सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है और हमारी सनातन परंपरा से जुड़ी मातृभाषा जैसी भावना रखती है।

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