Lucknow, India

Mizoram: सामूहिक दुष्कर्म-एसिड अटैक के दोषी दो BSF जवानों को 42 साल की जेल, नौ साल बाद पीड़िता को मिला इंसाफ

Published 17 June 2026 · india

यह घटना 16 जुलाई 2017 की है। पीड़िता अपनी एक सहेली के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा के पास ममित जिले के जंगलों में जंगली सब्जियां इकट्ठा

यह घटना 16 जुलाई 2017 की है। पीड़िता अपनी एक सहेली के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा के पास ममित जिले के जंगलों में जंगली सब्जियां इकट्ठा करने गई थी। वहां बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात बीएसएफ जवान नीलांजन दास और दिनेश कुमार ने दोनों महिलाओं को घेर लिया। जवानों ने महिला के साथ जबरन दुष्कर्म किया। इसके बाद अपनी पहचान छिपाने के मकसद से उन्होंने महिला के चेहरे पर तेजाब फेंक दिया ताकि वह अंधी हो जाए।

इस भयानक हमले में महिला किसी तरह बच गई। हालांकि उसके आंखों की रोशनी चली गई और उसका चेहरा हमेशा के लिए बिगड़ गया।घटना के समय पीड़िता की सहेली रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी। 11 दिन बाद उसकी सड़ी-गली लाश जंगल से बरामद हुई। हालांकि, पुख्ता सबूत न होने के कारण अदालत ने जवानों को हत्या के आरोपों से बरी कर दिया।दोषियों तक पहुंचना पुलिस के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था। शुरुआत में बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच में सहयोग नहीं किया।

उन्होंने जवानों की गिरफ्तारी और डीएनए जांच के लिए सैंपल देने का विरोध किया था। बाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और कई संगठनों के दबाव के बाद अधिकारी जांच के लिए तैयार हुए। ड्यूटी रजिस्टर की जांच से पता चला कि घटना के समय दोनों जवान उसी इलाके में तैनात थे। इसके बाद आइजोल में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट की देखरेख में आयोजित 'टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड' के दौरान पीड़िता ने दोषियों की पहचान कर ली।कोर्ट ने 18 गवाहों के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दोनों जवानों को कड़ी सजा सुनाई।

उन्हें अलग-अलग अपराधों के लिए कुल 42 साल की जेल काटनी होगी। इसमें सामूहिक दुष्कर्म के लिए 20 साल, एसिड अटैक के लिए 12 साल और गंभीर चोट पहुंचाने के लिए 10 साल की सजा शामिल है। साथ ही, अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 60-60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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