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News Updates: हवाई सुरक्षा अभेद्य बनाने की तैयारी, सेना खरीदने जा रही टारगेट रॉकेट

Published 16 June 2026 · world

आधुनिक युद्ध में ड्रोन और स्वार्म ड्रोन हमलों ने दुनियाभर की सेनाओं के सामने हवाई खतरों की पहचान और जवाबी कार्रवाई की नई चुनौतियां पेश

आधुनिक युद्ध में ड्रोन और स्वार्म ड्रोन हमलों ने दुनियाभर की सेनाओं के सामने हवाई खतरों की पहचान और जवाबी कार्रवाई की नई चुनौतियां पेश की हैं। भारत ने 2020 की गलवां घाटी झड़प और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ जारी सैन्य तनाव के बाद अपनी वायु रक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण की गति काफी बढ़ा दी है। प्रणाली की खासियतें इस नए टारगेट रॉकेट सिस्टम के लिए न्यूनतम गति 180 मीटर प्रति सेकंड होनी चाहिए, ताकि यह तेज गति से आने वाली दुश्मन की मिसाइलों का सटीक प्रतिरूप बन सके।

रॉकेट की रेंज 6 किमी से अधिक होनी चाहिए। आधुनिक युद्ध में ड्रोन और स्वार्म ड्रोन हमलों ने दुनियाभर की सेनाओं के सामने हवाई खतरों की पहचान और जवाबी कार्रवाई की नई चुनौतियां पेश की हैं। भारत ने 2020 की गलवां घाटी झड़प और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ जारी सैन्य तनाव के बाद अपनी वायु रक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण की गति काफी बढ़ा दी है।इस नए टारगेट रॉकेट सिस्टम के लिए न्यूनतम गति 180 मीटर प्रति सेकंड होनी चाहिए, ताकि यह तेज गति से आने वाली दुश्मन की मिसाइलों का सटीक प्रतिरूप बन सके।

रॉकेट की रेंज 6 किमी से अधिक होनी चाहिए। सेना ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली को अचूक बनाने के लिए स्वदेशी इंटरमीडिएट टारगेट सिस्टम की खरीद के लिए सूचना अनुरोध (आरएफआई) जारी किया है। आसान शब्दों में कहें तो सेना

को एक ऐसे अत्याधुनिक रॉकेट की तलाश है, जो अभ्यास के दौरान दुश्मन की क्रूज मिसाइल या लड़ाकू ड्रोन की सटीक नकल कर सके। इसके जरिये सेना अपनी हवाई रक्षा प्रणालियों को वास्तविक खतरों से निपटने का अभ्यास करा सकेगी।

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