जिस दल में जा रहे TMC के बागी, उसके पदाधिकारियों को मीडिया से पता चली विलय की बात, कौन-क्या बोला?
त्रिपुरा की एक गुमनाम पार्टी में अचानक 20 लोकसभा सांसद शामिल हो जाते हैं। ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष को इसकी जानकारी देते हैं। इसके बाद
त्रिपुरा की एक गुमनाम पार्टी में अचानक 20 लोकसभा सांसद शामिल हो जाते हैं। ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष को इसकी जानकारी देते हैं। इसके बाद शुरू होती है इस पार्टी को जानने की कोशिश। हर कोई इस पार्टी के इतिहास, वर्तमान, नेताओं और चुनावी प्रदर्शन के बारे में जानना चाहता है। ये एनसीपीआई क्या है? जिस पार्टी में टीएमसी से बागी सांसद जा रहे हैं, उस पार्टी के नेताओं का क्या कहना है? इन नेताओं को इस विलय का पता कब चला?
इन्होंने विलय की प्रक्रिया में क्या भूमिका निभाई? इन्ही सवालों के जवाब जानने के लिए हमने भी इस पार्टी के एक दो नहीं बल्कि पांच नेताओं से बात की। इस दौरान सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि जिस NCPI में सांसदों के शामिल होने की बात कही जा रही है, उसके कई संस्थापक नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए मिली। इन नेताओं ने अमर उजाला से बातचीत में क्या कहा? और इस पार्टी का इतिहास क्या है?
आइये जानते हैं... एनसीपीआई त्रिपुरा का एक पंजीकृत गैर-मान्याप्राप्त दल है। इस पार्टी का गठन 2022 में हुआ था। शिउली कुंडू इसकी संस्थापक अध्यक्ष हैं। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। दोनों ही उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। एनसीपीआई का चुनाव चिन्ह पेन की नीब और सात किरणें हैं। उनाकोटी जिले की कैलाशहर सीट से चुवाव लड़े जहांगीर अली को 285 वोट मिले थे। यहां टीएमसी उम्मीदवार को एनसीपीआई के उम्मीदवार को से ज्यादा (692) वोट मिले थे।
वहीं, धलाई जिले की चावमानु सीट से चुनाव लड़े बरजेदा त्रिपुरा को 536 वोट से संतोष करना पड़ा था। बरजेदा से जब अमर उजाला ने टीएमसी के बागी विधायकों के विलय के संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें भी मीडिया के जरिए इस विलय के बारे में पता चला। बरजेदा खुद को पार्टी के संस्थापक सदस्यों में बताते हैं।
