Bengal TMC Rift: बगावत-NCPI में विलय पर स्पीकर बिरला लेंगे अंतिम फैसला; ओवैसी ने गिनाए ममता की हार के चार कारण
सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को दोपहर करीब दो बजे स्पीकर के दफ्तर से ईमेल मिला, जिसमें उन्हें चार बजे मिलने के लिए बुलाया गया
सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को दोपहर करीब दो बजे स्पीकर के दफ्तर से ईमेल मिला, जिसमें उन्हें चार बजे मिलने के लिए बुलाया गया था। इसके तुरंत बाद स्पीकर के दफ्तर ने सांसद कीर्ति आजाद को भी इसकी जानकारी दी। कीर्ति आजाद ने जवाब में बताया कि अभिषेक जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग कर रहे हैं और उस वक्त वे ईडी के दफ्तर में मौजूद थे। बाद में कीर्ति आजाद ने खुद स्पीकर से मिलकर इस स्थिति की जानकारी दी। अभिषेक बनर्जी रात करीब 12 बजे पूछताछ के बाद बाहर निकले।यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) के साथ विलय का एलान कर दिया।
इन सांसदों का दावा है कि वे ही असली टीएमसी हैं और वे एनडीए (NDA) को समर्थन देना चाहते हैं। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि दो-तिहाई सांसदों ने अलग बैठने की व्यवस्था के लिए स्पीकर को पत्र सौंपा है।लोकसभा अध्यक्ष इस मामले में कानून मंत्रालय से कानूनी राय ले सकते हैं। वे चाहते हैं कि उनका फैसला इतना मजबूत हो कि अगर उसे अदालत में चुनौती दी जाए, तो वह टिक सके। यह फैसला जुलाई में शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले आने की उम्मीद है।संविधान विशेषज्ञ पीडीटी अचारी ने इस मामले पर अपनी राय दी है। उन्होंने बताया कि संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार, केवल एक राजनीतिक दल ही दूसरे दल में विलय कर सकता है।
सांसद या विधायक अकेले किसी दूसरे दल में विलय नहीं कर सकते। चुनाव आयोग के एक पूर्व अधिकारी ने इस विलय को एक नया प्रयोग बताया है, जिसका दलबदल विरोधी कानून में कोई जिक्र नहीं है। जिस एनसीपीआई (NCPI) पार्टी के साथ विलय की बात हो रही है, वह जनवरी 2023 में पंजीकृत हुई थी और उसका पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले का है।वहीं इस बीच एआईएमआईएम (AIMIM) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों पर टीएमसी (TMC) को घेरा है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि टीएमसी की हार के पीछे भ्रष्टाचार और खराब शासन जैसे कई कारण हैं। ओवैसी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने राज्य के मुसलमानों को धोखा दिया और उनकी परवाह नहीं की।
ओवैसी ने कहा कि ममता बनर्जी का जनता से संपर्क पूरी तरह खत्म हो गया था। उन्होंने एसआईआर (SIR) को भी एक अहम मुद्दा बताया।ओवैसी ने याद दिलाया कि कोलकाता हाई कोर्ट ने करीब दो साल पहले पांच लाख ओबीसी (OBC) प्रमाण पत्र रद्द किए थे। इनमें से तीन लाख प्रमाण पत्र अकेले मुसलमानों के थे। ओवैसी के मुताबिक, ममता सरकार चाहती तो इसके खिलाफ कानून बना सकती थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें नागरिक के तौर पर हक मिलना चाहिए।
