Explainer: मिलते भाजपा के नेताओं से रहे, विलय NCPI में क्यों कर लिया; टीएमसी के बागियों की ये कैसी रणनीति?
ये एनसीपीआई क्या है? टीएमसी के बागियों ने इस गुमनाम दल में विलय का रास्ता क्यों चुना? एनसीपीआई त्रिपुरा का एक पंजीकृत गैर-मान्याप्राप्त दल है।
ये एनसीपीआई क्या है? टीएमसी के बागियों ने इस गुमनाम दल में विलय का रास्ता क्यों चुना? एनसीपीआई त्रिपुरा का एक पंजीकृत गैर-मान्याप्राप्त दल है। इस पार्टी का गठन 2022 में हुआ था। शिउली कुंडू इसकी संस्थापक अध्यक्ष हैं। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। दोनों ही उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।उनाकोटी जिले की कैलाशहर सीट से चुवाव लड़े जहांगीर अली को 285 वोट मिले थे।
यहां टीएमसी उम्मीदवार को एनसीपीआई के उम्मीदवार को से ज्यादा (692) वोट मिले थे। वहीं, धलाई जिले की चावमानु सीट से चुनाव लड़े बरजेदा त्रिपुरा को 536 वोट से संतोष करना पड़ा था। बरजेदा से जब अमर उजाला ने टीएमसी के बागी विधायकों के विलय के संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें भी मीडिया के जरिए इस विलय के बारे में पता चला। बरजेदा खुद को पार्टी के संस्थापक सदस्यों में बताते हैं।बगियों ने दल बदल कानून से बचने के लिए एनसीपीआई में विलय का रास्ता चुना।
साथ ही बागी असली टीमसी का दावा करने के लिए समय चाहते थे। दरअसल, दसवीं अनुसूची के पैरा 4 में कहा गया है कि विलय के मामले में दल-बदल के आधार पर अयोग्यता लागू नहीं होती है। किसी सदन के सदस्य की मूल राजनीतिक पार्टी का विलय तब माना जाता है जब संबंधित विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य ऐसे विलय के लिए सहमत हों।इस मामले में बागी गुट के नेता सुदीप बंदोपाध्याय का कहना है कि हमने एनसीपीआई में विलय किया है।
जो एक राजनीतिक दल है। जब पार्टी के दो-तिहाई विधायीदल अलग होता है तो आप पहले ही दिन पार्टी के नाम पर दावा नहीं कर सकते है। बंधोपाध्याय कहते हैं कि जुलाई में जब संसद सत्र शुरू होगा तब हम तृणमूल पर दावा पेश करेंगे। तब कोर्ट तय करेगा कि असली टीएमसी कौन है।
