रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग: DRDO ने किया स्वदेशी लॉन्ग रेंज क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण, भारत की बढ़ी ताकत
इस सफल परीक्षण से भारत की ताकत का पता चलता है। अब भारत लंबी दूरी तक बिल्कुल सटीक निशाना लगा सकता है। उड़ान के दौरान
इस सफल परीक्षण से भारत की ताकत का पता चलता है। अब भारत लंबी दूरी तक बिल्कुल सटीक निशाना लगा सकता है। उड़ान के दौरान मिसाइल की नई तकनीकों को परखा गया। यह मिसाइल सभी पैमानों पर पूरी तरह खरी उतरी है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि मिसाइल के सभी कलपुर्जों ने बेहतरीन काम किया। यह कामयाबी देश की सैन्य ताकत को बहुत मजबूत करेगी।यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है।
इसे भारत में ही तैयार किया गया है। डीआरडीओ ने इसे भारतीय उद्योगों के सहयोग से बनाया है। रक्षा मंत्रालय ने इस सफलता को 'आत्मनिर्भर भारत' के लिए एक बहुत बड़ा कदम बताया है। इससे हमारे देश के रक्षा उद्योग को बहुत बढ़ावा मिलेगा। अब रक्षा तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता कम होगी।यह लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल भारत के पुराने 'निर्भय' मिसाइल कार्यक्रम का ही एक बेहद आधुनिक और स्वदेशी रूप है।
भारत ने साल 2013 में 'निर्भय' मिसाइल का परीक्षण शुरू किया था, जिसके बाद डीआरडीओ ने इसमें से विदेशी कलपुर्जे हटाकर पूरी तरह भारत में बना 'माणिक' इंजन और स्वदेशी नेविगेशन तकनीक लगाई। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने तीनों सेनाओं के लिए इस मिसाइल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, जिसका पहला सफल फ्लाइट-टेस्ट अब ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से पूरा कर लिया गया है।यह एक मल्टी-प्लेटफॉर्म मिसाइल है, जिसे भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर तैनात करेगी, जबकि थल सेना और वायुसेना भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगी।
भारत के पास पहले से मौजूद 'ब्रह्मोस' मिसाइल अपनी तेज रफ्तार के कारण 290 से 500 किमी तक मार करती है, वहीं यह मिसाइल जमीन से बिल्कुल सटकर उड़ती है, जिससे दुश्मन का रडार इसे पकड़ नहीं पाता और यह कम खर्च में लंबी दूरी के लक्ष्यों को तबाह करने की भारत को बड़ी क्षमता देती है।
