Lucknow, India

TMC बागियों पर सौगत रॉय का हमला: बोले- सांसदी बचाने को NCPI का लिया सहारा; BJP ने थमाया किराए का घर

Published 15 June 2026 · politics

टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इस दलबदल पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का एक गुमनाम दल में

टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इस दलबदल पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का एक गुमनाम दल में जाना बेहद दुखद है। सौगत रॉय ने बताया कि एनसीपीआई बंगाल में सिर्फ रजिस्टर्ड पार्टी है। इस पार्टी ने अपने उम्मीदवार त्रिपुरा में उतारे थे। ऐसे दल के साथ विलय करने का कोई राजनीतिक मतलब नहीं है। बागी सांसदों ने अपनी इज्जत पूरी तरह खो दी है। सौगत रॉय के अनुसार, यह पूरा ड्रामा केवल दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए किया गया है।सौगत रॉय ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का भी बचाव किया।

केंद्रीय एजेंसियां लगातार अभिषेक बनर्जी से पूछताछ कर रही हैं। इस पर सौगत रॉय ने कहा कि सीआईडी और ईडी की यह कार्रवाई पूरी तरह प्रतिशोध की राजनीति है। केंद्र सरकार विपक्ष को पूरी तरह खत्म करना चाहती है। यह पूरी तरह से भाजपा की कार्यशैली है। भाजपा विपक्षी नेताओं को चैन से काम नहीं करने देना चाहती।टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने बागी सांसदों पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन सांसदों के लिए असली सच बहुत कड़वा है। भाजपा ने इन बागी सांसदों के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं। ये सांसद लगातार भाजपा नेताओं के चक्कर काट रहे थे।

इसके बावजूद भाजपा ने इन्हें सीधे अपनी पार्टी में शामिल नहीं किया। भाजपा ने इन्हें रहने के लिए एक 'किराए का मकान' यानी एनसीपीआई थमा दिया है।कुणाल घोष ने दावा किया कि एनसीपीआई के अंदर इस विलय को लेकर कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई है। इन सांसदों को पार्टी का झंडा तक नहीं मिला है। इसके साथ ही घोष ने विधायक नैना बंदोपाध्याय के बारे में भी बात की। उन्होंने उम्मीद जताई कि नैना ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगी। नैना के पति सुदीप बंदोपाध्याय पार्टी बदलने में माहिर हैं और वे जा चुके हैं, लेकिन नैना अपनी कसम निभाएंगी।सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार इस बागी गुट का नेतृत्व कर रहे हैं।

टीएमसी के पास लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं, जिनमें से 20 सांसद टूट चुके हैं। यह संख्या दलबदल कानून से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई के आंकड़े को पूरा करती है। बागी गुट इसे जुलाई में शुरू होने वाले संसद सत्र से पहले एक सुरक्षित रास्ता मान रहा है। दूसरी तरफ, टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि कानून के मुताबिक मूल पार्टी का विलय होना जरूरी है। इस मामले पर अब लोकसभा अध्यक्ष के सामने बड़ी कानूनी जंग होना तय है।

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