₹75 के बैंक बैलेंस से 5वीं बड़ी पार्टी तक: सांसदों के विलय के एलान के बाद चर्चा में आई NCPI, जानें प्रमुख कौन
तृणमूल कांग्रेस में जारी सियासी उठापटक के बीच रविवार को एक ऐसी पार्टी का नाम सामने आया है, जिसके बारे में कल तक किसी को
तृणमूल कांग्रेस में जारी सियासी उठापटक के बीच रविवार को एक ऐसी पार्टी का नाम सामने आया है, जिसके बारे में कल तक किसी को पता भी नहीं था। टीएमसी के बागी 20 सासंदों का नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में विलय के एलान के बाद यह पार्टी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। अगर टीएमसी के 20 सांसद इस पार्टी में शामिल हो जाते हैं तो कल तक गुमनाम यह पार्टी देश की पांचवी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) के फेसबुक पेज पर पश्चिम बंगाल लोकसभा सीट-पार्टी-वार ब्योरा नाम से एक पोस्ट है। इसमें दिखाया गया है कि संसद के निचले सदन (लोकसभा) में पार्टी के 20 सदस्य हैं। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 12 और राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के आठ सदस्य हैं। कांग्रेस का एक सदस्य है और एक सीट (बसीरहाट) मौजूदा सदस्य की मौत के बाद खाली है। दिलचस्प बात यह है कि मामूली शुरुआत और 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बावजूद एनसीपीआई हाल ही में चर्चा में आई है, खासकर रविवार को जब तृणमूल के 20 बागी सांसदों के इसमें शामिल होने से इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।एनसीपीआई लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है,भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके के बाद पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है, बशर्ते स्पीकर इसे मंजूरी दें। जनवरी 2023 में रजिस्टर्ड यह पार्टी अभी भारत के चुनाव आयोग के पास रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के तौर पर दर्ज है।
इस तरह से यह कानूनी रूप से पंजीकृत पार्टी तो है, लेकिन इसे राज्य या राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर मान्यता नहीं मिली है। इसलिए इसे चुनाव के लिए आरक्षित चुनाव चिह्न नहीं मिलते और न ही सरकारी मीडिया पर मुफ्त एयरटाइम या प्रचार के लिए सब्सिडी वाली सुविधाएं जैसी सहूलियतें मिलती हैं। मान्यता पाने के लिए लगातार अच्छा चुनावी प्रदर्शन करना होगा और राज्य या राष्ट्रीय चुनावों में तय वोट शेयर या सीटों की संख्या हासिल करनी होगी।आर्थिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड बताते हैं कि पार्टी को कुल 1.13 लाख रुपए का चंदा मिला है, जो इसके सीमित आर्थिक आधार को दिखाता है। रिपोर्टों के अनुसार, यह पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बांकरा शहर के एक पते पर रजिस्टर्ड है। कहा जाता है कि पार्टी त्रिपुरा में कुछ सामाजिक गतिविधियों में शामिल रही है और उसने 2023 के विधानसभा चुनावों में कुछ सीटों पर चुनाव भी लड़ा था, लेकिन चुनावी तौर पर कोई खास असर नहीं डाल पाई।नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑ इंडिया के पास वित्त वर्ष 2022-23 के आखिर में कैश के तौर पर सिर्फ 75 रुपये बचे थे। यह जानकारी पार्टी की ओर से भारत के चुनाव आयोग को 2022-23 के लिए सौंपी गई सालाना ऑडिटर रिपोर्ट में सामने आई है। यह रिपोर्ट एक ऐसी कम जानी-पहचानी पार्टी की तस्वीर पेश करती है, जो अब अचानक राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है। बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि टीएमसी के 20 सांसदों ने स्पीकर को सौंपे गए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
