Lucknow, India

आधार पर आर-पार: केवल पहचान पत्र के रूप में हो इस्तेमाल, सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को होगी अहम सुनवाई

Published 14 June 2026 · india

यह जनहित याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने लगी है। यह याचिका प्रसिद्ध वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर

यह जनहित याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने लगी है। यह याचिका प्रसिद्ध वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार, राज्यों और चुनाव आयोग को कड़े निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें साफ कहा गया है कि आधार को सिर्फ पहचान का दस्तावेज माना जाए। इसे नागरिकता, स्थायी निवास, पता या जन्मतिथि साबित करने का जरिया न बनाया जाए। अधिवक्ता अश्वनी दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में वर्तमान व्यवस्था पर कई कानूनी सवाल उठाए गए हैं।याचिका के अनुसार, नए वोटर रजिस्ट्रेशन (फॉर्म-6) में आधार को जन्मतिथि और पते के सबूत के तौर पर लिया जा रहा है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह प्रक्रिया कानून के खिलाफ है। यह आधार अधिनियम 2016 की धारा 9, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 का सीधा उल्लंघन है। आधार अधिनियम की धारा 9 साफ कहती है कि आधार नागरिकता या अधिवास का प्रमाण नहीं है। यूआईडीएआई की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना में भी यही बात स्पष्ट की गई थी कि आधार केवल पहचान का प्रमाण है, नागरिकता या जन्मतिथि का नहीं।याचिका में चेतावनी दी गई है कि इस कमी का फायदा उठाकर घुसपैठिए और अवैध अप्रवासी भी आसानी से दूसरे सरकारी दस्तावेज बनवा रहे हैं।

आजकल स्कूल एडमिशन, प्रॉपर्टी की खरीद, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और जन्म प्रमाण पत्र के लिए आधार का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि फॉर्म-6 के तहत मौजूदा जांच प्रणाली बहुत कमजोर है। इसके कारण बिना सही दस्तावेजों के भी बाहरी लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल होने का खतरा है। कोर्ट से मांग की गई है कि चुनावी डेटाबेस की सुरक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय निगरानी समिति बनाई जाए।

इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हों।

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