Explainer: क्या अल नीनो बढ़ाएगा किसानों की मुश्किलें, आपकी जेब पर कितना होगा असर, सरकार की तैयारी कैसी?
भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है? भारत में अल नीनो का संबंध कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून से जोड़ा जाता है। हालांकि हर अल नीनो
भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है? भारत में अल नीनो का संबंध कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून से जोड़ा जाता है। हालांकि हर अल नीनो वर्ष में सूखा नहीं पड़ता, लेकिन इतिहास बताता है कि देश के कई बड़े मानसूनी संकट इसी घटना के दौरान देखने को मिले हैं। कृषि मंत्रालय ने देशभर में 197 ऐसे जिलों की पहचान की है जिन पर अल नीनो का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।
इन जिलों में सिंचाई सुविधाओं की पहुंच सीमित होने के कारण खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित होने की आशंका है। सरकार ने क्या तैयारी की है? कृषि मंत्रालय ने "खेत बचाओ अभियान" भी शुरू किया है, जिसके जरिए किसानों तक समय रहते मौसम संबंधी चेतावनियां, फसल प्रबंधन सलाह और वैकल्पिक कृषि उपाय पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। सरकार की कोशिश संकट आने के बाद राहत देने के बजाय पहले से तैयारी कर नुकसान को कम करना।
इसके लिए प्रत्येक राज्य के लिए अलग-अलग आकस्मिक योजना तैयार की गई हैं, ताकि बारिश की कमी या सूखे जैसी स्थिति बनने पर स्थानीय जरूरतों के अनुसार तुरंत कदम उठाए जा सकें। अल नीनो की स्थिति की समीक्षा के लिए नियमित रूप से साप्ताहिक बैठकें की जा रही हैं। सरकार का दावा है कि खाद्य सुरक्षा को लेकर भी तैयारी की गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार देश में पर्याप्त खाद्यान्न बफर स्टॉक मौजूद है और अल नीनो के बावजूद खाद्य संकट की आशंका नहीं है।
खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जबकि आगामी रबी सीजन के लिए उर्वरकों की आपूर्ति नवंबर से शुरू करने की योजना है।
