Lucknow, India

अयोध्या राम मंदिर दान विवाद: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, याचिकाकर्ता बोले- एफआईआर के साथ सीबीआई करे पूरी जांच

Published 15 June 2026 · world

अर्जी में कहा गया है कि यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था और भरोसे से जुड़ा है। राम मंदिर के दान के पैसों में गड़बड़ी

अर्जी में कहा गया है कि यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था और भरोसे से जुड़ा है। राम मंदिर के दान के पैसों में गड़बड़ी या उनके गायब होने की खबरों ने देश और विदेश के भक्तों को बहुत चिंतित कर दिया है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक आपराधिक मामला या एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। अर्जी के अनुसार, एफआईआर न होने से संस्थान की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।वकील ने स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्ति, संस्था या ट्रस्ट के सदस्यों पर कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं। ट्रस्ट के सदस्यों ने बहुत सराहनीय काम किया है।

लेकिन आरोपों की गंभीरता और इस मंदिर के महत्व को देखते हुए, जांच में पारदर्शिता और विश्वसनीयता का स्तर बहुत ऊंचा होना चाहिए। भक्तों ने जो दान दिया है, वह उनकी पवित्र भेंट है। यह केवल पैसों के लेन-देन का विवाद नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे सम्मानित धार्मिक स्थलों में से एक के प्रबंधन पर जनता के विश्वास का सवाल है।अर्जी में यह भी तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार की एसआईटी अकेले काफी नहीं है। जब तक किसी संवैधानिक अदालत की निगरानी में जांच नहीं होगी, भक्तों के मन में शंका बनी रहेगी। एफआईआर दर्ज न करने से ऐसा संदेश जा रहा है जैसे इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही माना जा रहा है, जबकि यह विश्वासघात का एक गंभीर आपराधिक मामला हो सकता है।

कुछ खबरों में यह भी कहा गया है कि दान के प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों के पास उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति मिली है। हालांकि, यह सच है या नहीं, यह जांच का विषय है। सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह दान के पैसों को सुरक्षित रखने के लिए एक पुख्ता तंत्र बनाए। साथ ही, दान के कलेक्शन, हिसाब-किताब, रख-रखाव और खर्च के हर पहलू की बारीकी से जांच के आदेश दे।इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यों की एसआईटी बनाई है। इसमें लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

इस टीम को 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट देनी है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी करोड़ों रुपये गायब होने का आरोप लगाकर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट ने खुद एसआईटी जांच का स्वागत किया है ताकि अफवाहों का सच सामने आ सके। ट्रस्ट के अधिकारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि रसीद वाले दान में कोई गड़बड़ी नहीं है, अगर कोई अंतर है तो वह दान पेटी के पैसों की गिनती में हो सकता है।

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