Lucknow, India

Kerala: मोहन भागवत के कार्यक्रम में पहुंचे कुलपति, केरल में छिड़ा सियासी संग्राम; भाजपा और यूडीएफ आमने-सामने

Published 15 June 2026 · india

कुलपतियों की मौजूदगी पर विवाद क्यों बढ़ा? भाजपा नेताओं ने कुलपतियों का बचाव कैसे किया? यूडीएफ सरकार और मंत्रियों ने क्या आपत्ति जताई?

कुलपतियों की मौजूदगी पर विवाद क्यों बढ़ा? भाजपा नेताओं ने कुलपतियों का बचाव कैसे किया? यूडीएफ सरकार और मंत्रियों ने क्या आपत्ति जताई? क्या यह विवाद केरल की राजनीति पर असर डालेगा? विवाद की शुरुआत तब हुई जब तीनों विश्वविद्यालयों के कुलपति तिरुवनंतपुरम में आयोजित आरएसएस के शताब्दी समारोह में पहुंचे, जहां मोहन भागवत ने संबोधन दिया। कांग्रेस नीत यूडीएफ नेताओं ने इसे विश्वविद्यालयों की निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्ष चरित्र के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि कुलपति जैसे संवैधानिक और शैक्षणिक पदों पर बैठे लोगों को किसी वैचारिक संगठन के कार्यक्रम में शामिल होने से बचना चाहिए। यूडीएफ नेताओं ने इसे गंभीर चूक बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की है।

इस मुद्दे ने देखते ही देखते राजनीतिक रंग ले लिया और सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई।भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने कुलपतियों की मौजूदगी का बचाव करते हुए कहा कि आरएसएस देश की एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक शक्ति है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल तीन कुलपति ही नहीं, भविष्य में अन्य कुलपति भी ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी कहा कि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कुलपतियों को निशाना बनाना उचित नहीं है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि किसी कार्यक्रम में भाग लेना व्यक्तिगत और सार्वजनिक दायरे का विषय है, इसे राजनीतिक विवाद का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कुलपतियों की मौजूदगी को बेहद गंभीर और अस्वीकार्य बताया।

उन्होंने कहा कि ऐसे कदम राज्य के शैक्षणिक संस्थानों की धर्मनिरपेक्ष और निष्पक्ष छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम जॉन ने भी कहा कि कुलपति केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की संस्थागत पहचान का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके अनुसार, ऐसे पदों पर बैठे लोगों को किसी वैचारिक ध्रुवीकरण का हिस्सा दिखने से बचना चाहिए। मंत्रियों ने कहा कि कुलपतियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना चाहिए कि कार्यक्रम में शामिल होना उनकी गलती थी और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचना चाहिए।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद केवल तीन कुलपतियों की मौजूदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में शिक्षा, वैचारिक राजनीति और संस्थागत स्वायत्तता को लेकर चल रही बड़ी बहस का हिस्सा बन चुका है।

यूडीएफ और भाजपा दोनों इस मुद्दे को अपने-अपने राजनीतिक नजरिए से पेश कर रहे हैं। वहीं आरएसएस और संघ परिवार की बढ़ती गतिविधियों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल यह मामला केरल की राजनीति और शैक्षणिक जगत में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

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