Lucknow, India

TMC में बड़ी टूट: ओम बिरला से मुलाकात के बाद काकोली घोष का एलान- त्रिपुरा की NCP में होगा बागी गुट का विलय

Published 14 June 2026 · india

इस एलान से पहले रविवार को काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय सहित टीएमसी के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से

इस एलान से पहले रविवार को काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय सहित टीएमसी के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इन बागी सांसदों ने लोकसभा के भीतर खुद के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की औपचारिक मांग की है। बागी गुट का दावा है कि उनके साथ टीएमसी के 28 में से 20 से 22 लोकसभा सांसद मौजूद हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से संसद के भीतर उन्हें असली टीएमसी विधायी दल के रूप में मान्यता देने की अपील की है। स्पीकर से मिलने से पहले इन बागी सांसदों ने भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली आवास पर जाकर लंबी रणनीति बैठक की। इस बैठक में सायोनी घोष और माला रॉय भी शामिल थीं।लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि एआईटीसी से चुने गए हम बीस सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा।

ये बीस सांसद हमारी कुल संख्या का दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सा हैं। हम नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी में विलय कर रहे हैं। आगे चलकर, हम देश के लिए काम करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एनडीए के साथ मिलकर काम करेंगे।सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि हम नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय करेंगे। यह एक क्षेत्रीय पार्टी है। नियम यही है। जब आप पार्टी के 2/3 सदस्यों के साथ अलग होते हैं, तो आप पहले ही दिन उस पार्टी का नाम नहीं मांग सकते। जुलाई में, हम तृणमूल का नाम हमें देने की मांग करेंगे क्योंकि हमारे पास तृणमूल का 2/3 बहुमत है। फिर कोर्ट तय करेगा।लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के साथ अपनी मुलाकात पर उन्होंने कहा कि ओम बिरला ने सभी हस्ताक्षरों की पुष्टि की। 20 हस्ताक्षर थे। अब यह 2/3 है।

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और शत्रुघ्न सिन्हा के बारे में उन्होंने कहा कि बिहार के लोग बंगाल की पार्टी को ज़्यादा समर्थन देते हैं।नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी मुख्य रूप से त्रिपुरा आधारित एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है। पूर्वोत्तर के राज्यों, विशेषकर त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में इस पार्टी का राजनीतिक आधार माना जाता है। यह कोई बहुत बड़ी या राष्ट्रीय स्तर की मुख्यधारा की पार्टी नहीं है, बल्कि एक छोटी और कम चर्चित पार्टी है।टीएमसी के बागी सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून की कानूनी अड़चनों से पार पाने के लिए बहुत सोच-समझकर इस पार्टी को चुना है। चूंकि संसद के नियमों के मुताबिक सदन में सीधे किसी अलग गुट को मान्यता नहीं मिल सकती और ऐसा करने पर सांसदी जाने का खतरा रहता है, इसलिए सदस्यता बचाने के लिए किसी मूल दल के साथ विलय करना कानूनी रूप से अनिवार्य था।

इस विलय के बाद यह बागी गुट एक नए तकनीकी और कानूनी ढांचे के साथ केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को अपना समर्थन सौंप देगा।जैसे ही बगावत की खबर फैली, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल टीएमसी ने भी जवाबी कानूनी कार्रवाई तेज कर दी। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजा। कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने इस पत्र को व्यक्तिगत रूप से स्पीकर को सौंपा।

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