बढ़ा TMC के बागियों का कुनबा: अब खुलकर बगावत पर उतरे सुदीप बंदोपाध्याय, दीदी को सिर्फ मार्गदर्शक बनाने पर अड़े
बागी गुट का दावा है कि दो और सांसद जल्द ही उनके साथ आने वाले हैं। इसके बाद लोकसभा में उनके समर्थकों की संख्या बढ़कर
बागी गुट का दावा है कि दो और सांसद जल्द ही उनके साथ आने वाले हैं। इसके बाद लोकसभा में उनके समर्थकों की संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी। 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को मिली करारी हार के बाद से ही पार्टी में बिखराव शुरू हो गया था। अब ये बागी सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे। वे संसद में एक अलग गुट के तौर पर अपनी पहचान की मांग करने वाले हैं।सुदीप बंदोपाध्याय बरसों तक दिल्ली में पार्टी की आवाज रहे हैं। 2011 से 2025 तक वे लोकसभा में टीएमसी के नेता भी थे।
उनके बागी खेमे में आने से समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। सुदीप का कहना है कि पार्टी के कई सांसद और विधायक यही चाहते हैं कि ममता बनर्जी केवल एक मार्गदर्शक के तौर पर बनी रहें। उन्होंने कहा कि सिर्फ इसीलिए मैं इन सांसदों का साथ देने आया हूं।यह पूरा घटनाक्रम बंगाल विधानसभा के बागी विधायकों से मिलता-जुलता है। वहां ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में पहले ही ममता को मेंटर बताकर संगठन पर कब्जा कर लिया गया है। सुदीप बंदोपाध्याय अभी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। उन्होंने अभी बागी नेताओं की पिटीशन पर दस्तखत नहीं किए हैं।
वे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से व्यक्तिगत मुलाकात करना चाहते हैं।इस बीच, सुदीप की सक्रियता ने दिल्ली की सरगर्मी बढ़ा दी है। उन्होंने शनिवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से लंबी मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी देर रात तक गुप्त मंत्रणा की। इतना ही नहीं, रविवार को भी वे भूपेंद्र यादव के घर पर रणनीति बनाते देखे गए।काकोली घोष दस्तीदार के मुताबिक, बागियों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। लोकसभा में 28 में से 19 सांसद पहले ही बगावत कर चुके थे। अब सुदीप के आने के बाद यह संख्या और मजबूत हो गई है।
बागी गुट का साफ कहना है कि अलग मान्यता मिलते ही वे संसद में भाजपा की एनडीए सरकार को समर्थन देंगे। टीएमसी की यह जंग अब राज्य विधानसभा और दिल्ली के संसद, दोनों जगह चरम पर है। ममता खेमे ने इस बगावत को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन बागी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
