गहनों का पता लगाने तांत्रिक के पास पहुंचा जांच अधिकारी, राजस्थान हाई कोर्ट ने दिया हटाने का आदेश
जागरण संवाददाता, जोधपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने नागौर जिले से संबंधित गहनों की चोरी के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि आपराधिक मामले की जांच किसी तांत्रिक के इशारों पर नहीं चल सकती। जस्टिस मुन्नरी लक्ष्मण की
जागरण संवाददाता, जोधपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने नागौर जिले से संबंधित गहनों की चोरी के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि आपराधिक मामले की जांच किसी तांत्रिक के इशारों पर नहीं चल सकती। जस्टिस मुन्नरी लक्ष्मण की सिंगल बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए नागौर एसपी को जांच अधिकारी को बदलने का आदेश दिया।
कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि आदेश की प्रति मिलने के 15 दिन के भीतर जांच श्रीबालाजी थाने से हटाकर किसी अन्य थाने के सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊंची रैंक के अधिकारी को सौंपी जाए। जांच अधिकारी पर अनुसंधान के दौरान तांत्रिक की मदद लेने का आरोप है। बता दें कि 80 वर्षीय महिला ने श्रीबालाजी थाने में 8 मार्च 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट में बताया था कि सात मार्च की रात को घर से उनके और उनकी बहू के गहने चोरी हो गए। इनमें डेढ़ तोला सोना, 300 तोला चांदी और 24 हजार कैश शामिल था। महिला ने जांच अधिकारी को चोरी में शामिल कुछ संदिग्ध लोगों के नाम भी दिए थे लेकिन पुलिस न तो आरोपितों को गिरफ्तार कर पाई और न ही चोरी हुए जेवर बरामद कर सकी।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि जांच अधिकारी ने साक्ष्य जुटाने की बजाय अंधविश्वास का सहारा लिया। जांच अधिकारी याचिकाकर्ता की बहू के पिता और गांव के कुछ अन्य बुजुर्गों को अलवर जिले में के एक तांत्रिक के पास ले गया। खबरें और भी
