बंगाल सरकार का फैसला: स्कूलों से तुरंत हटेंगे पढ़ाई में बाधा बन रहे केंद्रीय बल, जिला प्रशासनों को निर्देश
स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल ही में जिलाधिकारियों और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में साफ कहा गया है कि
स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल ही में जिलाधिकारियों और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में साफ कहा गया है कि गर्मी की छुट्टियों के बाद एक जून से स्कूलों में कक्षाएं फिर से शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में चुनाव ड्यूटी के लिए तैनात केंद्रीय बलों की ओर से शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा बनाए रखने का अब कोई औचित्य नहीं है।विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चुनावी प्रक्रिया खत्म होने के बावजूद राज्य भर के लगभग 165 स्कूलों में अब भी सीएपीएफ के जवान मौजूद हैं।
स्कूल परिसरों में सुरक्षाकर्मियों की लगातार मौजूदगी के कारण शिक्षण और सीखने की सामान्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही थीं।शिक्षा विभाग के अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि शैक्षणिक संस्थानों को सामान्य रूप से चलने दिया जाना चाहिए। जिला प्रशासनों को निर्देश दिया गया है कि वे सीएपीएफ के लिए गैर-शैक्षणिक सरकारी भवनों में वैकल्पिक व्यवस्था करें। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करें कि स्कूल परिसरों को बिना किसी देरी के खाली कराया जाए।
चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों ने विभिन्न जिलों के स्कूलों में अस्थायी कैंप बनाए थे। इसके बाद कई स्कूलों के शिक्षकों ने शिकायत की थी कि कक्षाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस वजह से उन्हें मजबूरन बरामदों, बालकनियों और अन्य अस्थायी जगहों पर कक्षाएं लेनी पड़ रही थीं।वर्तमान में सीएपीएफ की 500 कंपनियां यानी लगभग 50,000 से 75,000 सुरक्षाकर्मी बंगाल में तैनात हैं। बंगाल सरकार के अनुरोध पर चुनाव के बाद कानून-व्यवस्था के प्रबंधन के लिए इन्हें मुख्य रूप से तैनात किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, इन जवानों को 20 जून तक राज्य में रुकना तय है। विधानसभा चुनाव अप्रैल में दो चरणों में आयोजित किए गए थे, जिसके परिणाम चार मई को घोषित किए गए थे।
