Lucknow, India

ED के 20 साल, सिर्फ 60 केस में फैसला हुआ:99% मामलों में अंतिम फैसला आना बाकी, 72% कुर्क संपत्ति वापस करनी पड़ी

Published 21 May 2026 · india

के 20 साल, सिर्फ 60 केस में फैसला हुआ: 99% मामलों में अंतिम फैसला आना बाकी, 72% कुर्क संपत्ति वापस करनी पड़ी नई दिल्ली लेखक: एम. रियाज हाशमी प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में अपनी सफलता की दर 93% बताती है, पर यह आंकड़ा पिछले 20 सालों के केवल

के 20 साल, सिर्फ 60 केस में फैसला हुआ: 99% मामलों में अंतिम फैसला आना बाकी, 72% कुर्क संपत्ति वापस करनी पड़ी नई दिल्ली लेखक: एम. रियाज हाशमी प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में अपनी सफलता की दर 93% बताती है, पर यह आंकड़ा पिछले 20 सालों के केवल उन 60 मामलों पर आधारित है जिनका ट्रायल पूरा हो चुका है। इन मामलों में से 56 में 124 लोगों पर दोष साबित हुआ और 4 में आरोपी बरी हुए। इसके विपरीत अगर कुल दर्ज मामलों से तुलना की जाए तो सफलता की यह वास्तविक दर केवल 0.68% रह जाती है, क्योंकि 99% मामलों में अभी अंतिम फैसला आना बाकी है। वहीं, संपत्ति कुर्क करने के मामले में भी ऐसा ही पैटर्न दिखता है।

इस दौरान एजेंसी ने 2,36,016 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कीं, जिनमें से कानूनी प्रक्रिया के बाद केवल 65,872.72 करोड़ रुपए की संपत्तियां ही स्थायी रूप से कुर्क हो पाईं। साफ है कि जांच और कुर्की की कार्रवाई तो बड़े पैमाने पर हुई है, लेकिन कानूनी रूप से अंतिम नतीजे तक पहुंचने वाले मामलों की संख्या 28% ही रही। ED ने साल 2025-26 में 81 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की चल-अचल संपत्ति जब्त की है। केस, कुर्की, गिरफ्तारी और ट्रायल के 20 साल के आंकड़े… मनी लॉन्ड्रिंग: 2014 के बाद केस 2 से 5 गुना बढ़े, पहले 200 केस औसत 2014 के बाद मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2005-2014 के दौरान ईडी औसतन 209 केस प्रति वर्ष दर्ज कर रही थी, जो 2014-2024 में बढ़कर 511 हो गए।

इसके बाद 2024-25 में 775 और 2025-26 में 1080 केस एक ही वर्ष में दर्ज किए गए। कार्रवाई: साल दर साल कुर्की का औसत 20 गुना तक ऐसे बढ़ गया 2005-2014: 574.5 करोड़ रु. प्रति वर्ष औसत की कुर्की या अटैच हो रही थी। 2014-2024: 11,938.63 करोड़ रु. प्रति वर्ष औसत रहा। 2024-25: 30,036.41 करोड़ रु. सिर्फ एक वर्ष में कुर्की दर्ज। 2025-26: 81,422.63 करोड़ रु. सिर्फ एक वर्ष में दर्ज की गई। गिरफ्तारी: हाल के सालों में कमी आई, इसके बावजूद संख्या बढ़ती गई 2005-2014: 3 गिरफ्तारी प्रति वर्ष औसत 2014-2024: 17 से बढ़कर 272 की वृद्धि 2024-25: 214 गिरफ्तारी सिर्फ एक साल में 2025-26: 156 गिरफ्तारी सिर्फ एक साल में सजा: 2005-2014 में कोई दोषसिद्धि नहीं, फिर दस साल में 38 में फैसला 2005-2014: कोई दोषसिद्धि नहीं हुई 2014-2024: 38 मामलों में सजा हुई 2024-25: 9 मामलों में सजा दी गई 2025-26: 9 मामलों में सजा दी गई निपटारा: 2019 के बाद रफ्तार बढ़ी, 2025-26 में 685 मामले बंद किए गए 2019 के बाद ईडी में मामलों के निपटारे और बंद करने की रफ्तार भी बढ़ी है।

2019-20 में 35 और 2020-21 में 36 मामले बंद हुए थे, जबकि 2021-22 में यह संख्या बढ़कर 148 पहुंच गई। इसके बाद 2022-23 में 66 और 2023-24 में 85 मामले बंद हुए, जबकि 2024-25 में 198 और 2025-26 में 685 मामलों को बंद किया गया।

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