Lucknow, India

राष्ट्रपति को विमानन विश्वविद्यालय कर्मी को बर्खास्त करने का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला

Published 21 May 2026 · world

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय के 'विजिटर' होने के नाते भारत के राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उसकी सेवाएं समाप्त करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। कोर्ट

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय के 'विजिटर' होने के नाते भारत के राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उसकी सेवाएं समाप्त करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पास विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

विवाद की जड़ पहले रजिस्ट्रार की बर्खास्तगी यह पूरा मामला अमेठी स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय के 'पहले रजिस्ट्रार' जितेंद्र सिंह से जुड़ा है। उनकी नियुक्ति साल 2019 में विश्वविद्यालय अधिनियम के विशेष प्रविधानों के तहत हुई थी। लेकिन नियुक्ति के बाद से ही उनका कार्यकाल कानूनी विवादों में घिर गया। साल 2020 में प्रोबेशन (परिवीक्षा) अवधि के दौरान ही उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जिसने एक लंबी कानूनी लड़ाई को जन्म दिया।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिसंबर 2021 में उन्हें बहाल तो किया गया, लेकिन उसी दिन एक नई जांच लंबित होने के कारण दोबारा निलंबित कर दिया गया। जब जांच समिति ने उन पर लगे अनुशासनहीनता और गंभीर अवज्ञा के आरोपों को सही पाया, तो अप्रैल 2022 में राष्ट्रपति ने 'विजिटर' के

रूप में उनकी बर्खास्तगी को मंजूरी दे दी थी। हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की असहमति इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस बर्खास्तगी को यह कहते हुए रद कर दिया था कि अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के पास है, न कि विजिटर या मंत्रालय के अधिकारियों के पास।

Read full story on TheBriefWire

Loading…