Lucknow, India

बेकार समझा जाने वाला कैक्टस बना किसानों का ‘ब्लू गोल्ड’:मेक्सिको में 1.4 लाख करोड़ रुपए की टकीला इंडस्ट्री, इसके लिए कच्चा माल भेज रहे भारतीय किसान

Published 14 June 2026 · world

भारत में एक कांटेदार रेगिस्तानी पौधे ने नई ड्रिंक्स इंडस्ट्री को जन्म दे दिया है। आंध्र प्रदेश के कांदुकुर में ज्यादातर किसान पहले टमाटर, मूंगफली

भारत में एक कांटेदार रेगिस्तानी पौधे ने नई ड्रिंक्स इंडस्ट्री को जन्म दे दिया है। आंध्र प्रदेश के कांदुकुर में ज्यादातर किसान पहले टमाटर, मूंगफली और मक्का उगाते थे। 2010 में कुछ व्यापारी एगेव अमेरिकाना नाम के कैक्टस की तलाश में कांदुकुर पहुंचे। इसे किसान बेकार समझकर खेत की बाड़ के रूप में लगाते थे। बीबीसी वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, यही एगेव कैक्टस मेक्सिको की 1.4 लाख करोड़ रुपए की टकीला और मेजकल इंडस्ट्री की रीढ़ है। मेक्सिको के जलिस्को राज्य में सिर्फ चुनी हुई जगहों पर उगने वाला ‘ब्लू एगेव’ टकीला बनाने के लिए मान्य है। भारत में अभी इसकी कमर्शियल खेती नहीं होती।

किसान और उद्यमी जंगली एगेव इकट्ठा करते हैं। कांदुकुर में अब 100 किमी के दायरे में कई गांवों के किसान डिस्टिलरीज को बड़े पैमाने पर सप्लाई कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें अच्छी कीमत मिलती है। इसीलिए इसे ‘ब्लू गोल्ड’ कहा जाने लगा है। एगेव की खेती मुश्किल है। पौधे का सबसे अहम हिस्सा ‘पीना’ (अनानास जैसा दिखने वाला कोर) होता है, जिसमें शुगर जमा होती है, लेकिन जैसे ही पौधा फूल देने लगता है, सारी शुगर तेजी से ऊपर तने की ओर चली जाती है और पीना बेकार हो जाता है। किसानों के मुताबिक, पौधे को फूल आने से ठीक पहले काटना पड़ता है। काटने के बाद 24 घंटे के भीतर इसे प्रेशर कुकर तक पहुंचाना जरूरी है, वरना शुगर सड़ने लगती है।

स्वाद खराब हो जाता है। भारत में एगेव स्पिरिट का बाजार सालाना 31% बढ़ रहा है। अब उपभोक्ता नए स्पिरिट्स आजमाने के लिए ज्यादा खुले हैं, हालांकि एगेव ड्रिंक्स व्हिस्की की जगह नहीं ले सकतीं, लेकिन यह अपना अलग बाजार बना सकती हैं। 2011 में भारत की पहली एगेव डिस्टिलरी शुरू करने वाले डेसमंड नजारेथ सैटेलाइट इमेजरी की मदद से इसकी खेती के लिए जमीन तलाश रहे हैं। एक बार गलत जगह लगाने पर 9-13 साल की मेहनत बेकार हो सकती है। हालांकि भारत और मेक्सिको के मॉडल में बड़ा फर्क है। मेक्सिको में दशकों की सेलेक्टिव ब्रीडिंग से एगेव की क्वालिटी एक जैसी है, जबकि भारत में शुगर की मात्रा अलग-अलग है।

इससे प्रोडक्शन स्टैंडर्डाइज करना मुश्किल है। यही वजह है कि ‘लोका लोका’ जैसे ब्रांड अब भी मैक्सिको से ब्लू एगेव मंगाते हैं। मेक्सिको में जलिस्को राज्य की लाल मिट्टी में वर्षों से एगेव की व्यवस्थित खेती होती है। भारत में अभी एगेव की संगठित खेती नहीं होती। कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में बिखरे जंगली पौधों को स्थानीय एजेंट इकट्ठा करते हैं। डेक्कन पठार के लाखों एकड़ उपयुक्त जमीन के साथ भारत भविष्य में मेक्सिको को टक्कर दे सकता है।

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