Rahul Gandhi: भारतीय नाविकों की मौत पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, कहा- कोई भी संप्रभु देश ऐसी भाषा नहीं सहता
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर क्या आरोप लगाए? अमेरिका और भारत के बीच विवाद की वजह क्या है? ओमान और होर्मुज से जुड़ा मामला
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर क्या आरोप लगाए? अमेरिका और भारत के बीच विवाद की वजह क्या है? ओमान और होर्मुज से जुड़ा मामला क्यों चर्चा में है? लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर हिंदी में पोस्ट कर कहा कि अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के कुछ दिन बाद भी न तो खेद व्यक्त किया गया और न ही माफी मांगी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके उलट अमेरिका भारत को निर्देश दे रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि एक संप्रभु राष्ट्र ऐसी भाषा कभी स्वीकार नहीं करेगा, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी चुप हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री को "समझौता कर चुके प्रधानमंत्री" बताते हुए कहा कि वे एक "आज्ञाकारी सेवक" की तरह आदेश सुनते हैं और उनका पालन करते हैं। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि ऐसा नेतृत्व देश के सम्मान की रक्षा नहीं कर सकता।यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उसकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल का अवैध परिवहन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत में यह बात कही। इससे पहले जयशंकर ने ओमान तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की मौत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को भी तलब कर स्पष्ट किया कि भारतीय चालक दल वाले वाणिज्यिक जहाजों पर घातक हमले स्वीकार्य नहीं हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है।राहुल गांधी ने ओमान के दुक्म बंदरगाह पर खड़े एक जहाज में मृत भारतीय नागरिक निशांत उर्थनाथन के मामले को भी उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से पार्थिव शरीर को जल्द भारत लाने की मांग की। दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर भारतीय जहाजों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया, जबकि ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
होर्मुज क्षेत्र में जारी तनाव और समुद्री यातायात में व्यवधान के कारण भारतीय नाविकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यह मुद्दा अब घरेलू राजनीति के साथ-साथ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस का भी केंद्र बन गया है।
