Lucknow, India

भारतीय फौज ने उतारे गुलामी के दौर के निशान:अब परेड में रिव्यूइंग अफसर तलवार नहीं रखेगा; पहली बार फॉर्मल ड्रेस में बंदी जैकेट शामिल

Published 14 June 2026 · india

भारतीय सेना ने जवानों की यूनिफॉर्म से गुलामी के दौर की निशानियों को हटा दिया है। 174 पेज की नई ‘आर्मी यूनिफॉर्म-2026’ बुक में कॉलोनियल

भारतीय सेना ने जवानों की यूनिफॉर्म से गुलामी के दौर की निशानियों को हटा दिया है। 174 पेज की नई ‘आर्मी यूनिफॉर्म-2026’ बुक में कॉलोनियल एरा के नियमों में भी बदलाव किया है। सेना का कहना है कि ये बदलाव भारत की संप्रभु पहचान और राष्ट्रीय भावना के मुताबिक किए गए हैं। नए नियमों में रिव्यूइंग ऑफिसर के लिए परेड में तलवार रखना वैकल्पिक कर दिया गया है। वहीं, कुछ मैस ड्रेस के साथ इस्तेमाल होने वाली पाउच बेल्ट हटाई गई है। इसके साथ ही रॉयल जैसे पुराने शब्दों का इस्तेमाल बंद किया गया है। पहली बार फॉर्मल सिविल ड्रेस में स्वदेशी बंदी जैकेट को भी शामिल किया गया है। बंद गले वाली बंदी जैकेट को फुल स्लीव शर्ट, फॉर्मल ट्राउजर और बंद जूतों के साथ पहना जा सकेगा।

सेना इससे पहले फरवरी 2023 में भी कई पुरानी परंपराएं खत्म कर चुकी है। इनमें समारोहों में घोड़ा-गाड़ी का इस्तेमाल, रिटायरमेंट के दौरान ‘पुल आउट’ इवेंट और डिनर में पाइप बैंड की परंपरा शामिल थी। तलवार का इस्तेमाल भी लिमिटेड किया गया नए नियमों के मुताबिक अब तलवार केवल परेड कमांडर, कंटिंजेंट कमांडर और कुछ निर्धारित अधिकारी ही रख सकेंगे। खास तौर पर गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, सेना दिवस और गार्ड ऑफ ऑनर जैसे प्रमुख समारोहों में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। नई गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि रिव्यूइंग अफसर परेड के दौरान तलवार नहीं रखेंगे। सेना का कहना है कि इन बदलावों का मकसद परंपराओं को खत्म करना नहीं, बल्कि गुलामी के दौर की बची हुई निशानियों को आधुनिक भारतीय सोच के अनुरूप बनाना है।

बिना परमिशन शादी-पार्टी, प्रदर्शनों में यूनिफॉर्म पहनने पर रोक मैनुअल में पर्सनल अपीयरेंस, मिलिट्री बिहेवियर और यूनिफॉर्म में कंडक्ट पर भी पूरी गाइडलाइन दी गई हैं। इसके अनुसार सैनिकों के बिना परमिशन दाढ़ी रखना, ऊट-पटांग हेयरस्टाइल, दिखने वाले इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, टैटू, बॉडी पियर्सिंग और मेकअप पर बैन रहेगा। साथ ही सेना से जुड़े अधिकारियों और जवानों को परमिशन नहीं होगी कि कि वे बिना इजाजत के पॉलिटिकल, धार्मिक या प्रोटेस्ट गैदरिंग, शादियों, प्राइवेट पार्टियों और पेड मीडिया इवेंट में यूनिफॉर्म पहनकर जाएं। इसी साल 246 सड़कों, इमारतों के भी नाम बदले इस साल की शुरुआत में, इंडियन आर्मी ने अपने सभी ठिकानों पर 246 सड़कों, इमारतों और सुविधाओं का नाम बदलकर औपनिवेशिक दौर की विरासत को खत्म करने की एक बड़ी पहल की।

​​इस कदम का मकसद भारत के अपने इतिहास, माहौल और मिलिट्री परंपराओं में निहित एक संस्थागत पहचान को मज़बूत करना है, साथ ही देश के वीरता पुरस्कार विजेताओं, युद्ध नायकों और जाने-माने मिलिट्री लीडरों का सम्मान करना है। इंडियन आर्मी के अधिकारियों के मुताबिक, इस एक्सरसाइज में 124 सड़कें, 77 कॉलोनियां, 27 इमारतें और दूसरी मिलिट्री सुविधाएं, और 18 अलग-अलग सुविधाएं शामिल थीं। इनमें पार्क, ट्रेनिंग एरिया, खेल के मैदान, गेट और हेलीपैड शामिल थे। दिल्ली कैंट में किर्बी प्लेस का नाम केनुगुरुसे विहार और मॉल रोड का नाम अरुण खेत्रपाल मार्ग रखा गया। इसी तरह अंबाला, मथुरा, जयपुर, बरेली, महू, देहरादून और कोलकाता समेत कई मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर में ब्रिटिश काल के नाम बदले गए।

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