सस्ते रूसी तेल पर भारत का भरोसा कायम: मई में बढ़ा 21 प्रतिशत आयात, बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार
ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती ईंधन आपूर्ति की जरूरतों के बीच भारत ने मई 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद और बढ़ा दी है।
ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती ईंधन आपूर्ति की जरूरतों के बीच भारत ने मई 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद और बढ़ा दी है। रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी तेल ने भारतीय रिफाइनरियों को आकर्षित किया है, जिसके चलते भारत दुनिया में रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। मई महीने में भारत ने रूस से लगभग 5.8 अरब यूरो मूल्य के हाइड्रोकार्बन आयात किए, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का रहा। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार भू-राजनीतिक घटनाओं और प्रतिबंधों के प्रभाव से लगातार बदल रहा है। रूस से भारत ने कितना तेल खरीदा? भारत के कुल कच्चे तेल आयात में मई के दौरान मासिक आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसका एक प्रमुख कारण रूस से आयात में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी रहा। रूस से आयातित तेल भारत के ऊर्जा मिश्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
भारतीय रिफाइनरियां रियायती कीमतों पर उपलब्ध रूसी तेल खरीदकर अपनी लागत कम कर रही हैं, जिससे उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी लाभ मिल रहा है। मई 2026 में रूस से भारत के कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 83 प्रतिशत रही। कच्चे तेल का आयात 4.8 अरब यूरो का रहा। इसके अलावा तेल उत्पादों का आयात 55 करोड़ यूरो और कोयले का आयात 42.9 करोड़ यूरो के स्तर पर रहा। आंकड़े बताते हैं कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में रूस की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद बदले वैश्विक ऊर्जा समीकरणों के बीच भारत ने रूस से तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा लागत को नियंत्रित रखने का प्रयास किया है। किन रिफाइनरियों में बढ़ी रूसी तेल की आवक? गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी और जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में रूसी कच्चे तेल की आवक में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वाडिनार रिफाइनरी में अप्रैल की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक रूसी तेल पहुंचा, जबकि जामनगर में यह बढ़ोतरी 14 प्रतिशत रही। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियां भी रूसी तेल की खरीद बढ़ा रही हैं। न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने मार्च में आयात दोबारा शुरू करने के बाद मई में भी खरीद जारी रखी। न्यू मैंगलोर में रूसी तेल की आपूर्ति 13 प्रतिशत बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम में 42 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई। पारादीप रिफाइनरी का रिकॉर्ड क्यों अहम है? ओडिशा स्थित पारादीप रिफाइनरी ने मई में पिछले दो वर्षों का सबसे अधिक रूसी कच्चा तेल उतारा। यह संकेत देता है कि भू-राजनीतिक दबावों और विभिन्न देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल अब भी आकर्षक विकल्प बना हुआ है। रियायती कीमतों के कारण भारतीय कंपनियां लागत कम करने में सफल हो रही हैं, जिससे ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिल रही है।
यही वजह है कि रूस भारतीय ऊर्जा बाजार का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। मई 2026 में रूस के कच्चे तेल निर्यात का सबसे बड़ा खरीदार चीन रहा, जिसने कुल निर्यात का 50 प्रतिशत हिस्सा खरीदा। इसके बाद भारत 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। तुर्किये और यूरोपीय संघ क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय रिफाइनरियों में रूसी कच्चे तेल से तैयार कुछ पेट्रोलियम उत्पाद अमेरिका, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों तक भी पहुंचे। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और देश केवल उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण रिफाइनिंग और निर्यात केंद्र के रूप में भी उभर रहा है।
