Lucknow, India

केंद्रीय मंत्री के संपर्क में असंतुष्ट गुट: ममता खेमे का अगला कदम क्या, कल्याण बनर्जी और सौगत रॉय क्या बोले?

Published 13 June 2026 · politics

कल्याण बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि जब हमें 2024 में पांच साल के कार्यकाल का जनादेश मिला था, तो कम से कम पांच

कल्याण बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि जब हमें 2024 में पांच साल के कार्यकाल का जनादेश मिला था, तो कम से कम पांच साल तक हमें सिर्फ पार्टी के काम पर ध्यान देना चाहिए था। चुनाव तो अपने समय पर होने ही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि अगर हम 2029 में और अधिक सीटें जीतकर वापस आते हैं, तो क्या भाजपा के सभी सदस्य इस्तीफा दे देंगे? कल्याण बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस तरह का बिखराव पहली बार हो रहा है। इसे राज्य के राजनीतिक इतिहास में हमेशा एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।पार्टी में मची इस टूट से आहत कल्याण बनर्जी ने अतीत का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के राजनेता चाहे कांग्रेस काल के हों, सीपीएम काल के हों या वाम मोर्चा के दौर के, वे कभी भी इस तरह से बिखरे हुए नहीं थे। राज्य में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ और सिर्फ निजी लालच की वजह से आज यह स्थिति पैदा हुई है। इन स्वार्थी लोगों ने ही मिलकर इस काले अध्याय को लिखा है।

हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि बंगाल की जनता बेहद समझदार है और वह अंततः इन लोगों को करारा जवाब देगी।टीएमसी के भीतर मचे आंतरिक गतिरोध और वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय के पार्टी का साथ छोड़ने पर कल्याण बनर्जी ने बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर सुदीप-दा चले गए हैं, तो चले जाएं। बहुत से लोग पार्टी छोड़कर गए हैं और सुदीप-दा भी चले गए हैं। इससे क्या फर्क पड़ता है? इससे कोई अंतर नहीं आने वाला। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग छोड़कर गए हैं, उन्हें कभी न कभी तो चुनाव का सामना करना ही पड़ेगा। जब वे जनता के बीच जाएंगे, तो आम लोग उन्हें अच्छी तरह सबक सिखाएंगे।कल्याण बनर्जी ने केंद्र सरकार और राज्य के विपक्षी नेताओं को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि हमारे लोकतंत्र में संसद और राज्य विधानसभाओं की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन आज देश में लोकतंत्र को ही नष्ट किया जा रहा है। चुनाव के बाद एक दल सरकार बनाता है और दूसरा विपक्ष में बैठता है। विपक्ष का काम सरकार की तारीफ करना नहीं है।

विपक्ष की मुख्य भूमिका देश के लिए बोलना, सरकार की गलतियों को उजागर करना और आम जनता की समस्याओं को उठाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बंगाल में शुभेंदु अधिकारी का सिर्फ एक ही एजेंडा है कि किसी भी तरह विपक्ष के दायरे और उनकी संख्या को छोटा कर दिया जाए, ताकि वे खुद विपक्ष के इलाके पर कब्जा कर सकें।वहीं, पार्टी के भीतर मची इस रार पर पार्टी विधायक कुणाल घोष ने रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ममता दीदी ने इन लोगों को राजनीति में ऊंचे पद और बड़ा सम्मान दिया, लेकिन बदले में इन लोगों ने दीदी को सिर्फ और सिर्फ धोखा दिया है। उन्होंने सुदीप बंदोपाध्याय पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उनका इतिहास हमेशा से पार्टियां बदलने का रहा है और वे सिर्फ ममता दीदी को गुमराह करके अपनी राजनीति चमकाते रहे हैं। घोष ने याद दिलाया कि एक समय इस सच को उजागर करने के लिए उन्हें खुद पार्टी से सस्पेंड होना पड़ा था, लेकिन आज सुदीप के इस कदम ने साबित कर दिया है कि वर्षों पहले कही गई उनकी बात शत-प्रतिशत सच थी।इसके अलावा पार्टी के भीतर मची इस बगावत पर पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत राय का भी एक बेहद चौंकाने वाला बयान सामने आया है।

दिल्ली में सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से हुई मुलाकात पर सौगत राय ने कहा कि सुदीप ने महज तीन-चार दिन पहले ही मुझसे बात की थी और भरोसा दिया था कि वह अभी कहीं नहीं जा रहे हैं। उन्होंने मुझसे यह भी कहा था कि अगर वह भविष्य में कोई कदम उठाएंगे भी, तो मुझसे पूछकर ही करेंगे। लेकिन आज मैंने देखा कि वह शताब्दी रॉय को अपने साथ लेकर बंगाल में 'ऑपरेशन लोटस' के प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंच गए। सौगत राय ने आहत मन से कहा कि अब इस पर मैं क्या ही कहूं? किसी पार्टी में टिके रहना या उसे छोड़ देना पूरी तरह से इंसान की नैतिकता और उसके जमीर पर निर्भर करता है।

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