Lucknow, India

Explainer: होर्मुज में भारतीयों की मौत पर सरकार ने क्या किया, बड़े कूटनीतिक मामलों में कैसा रहा है हमारा रुख?

Published 13 June 2026 · politics

2017: उजमा अहमद मामला क्या था मामला? दिल्ली की रहने वाली उजमा अहमद पाकिस्तान गई थीं। वहां उन्होंने आरोप लगाया कि एक पाकिस्तानी नागरिक ने

2017: उजमा अहमद मामला क्या था मामला? दिल्ली की रहने वाली उजमा अहमद पाकिस्तान गई थीं। वहां उन्होंने आरोप लगाया कि एक पाकिस्तानी नागरिक ने उन्हें बंदूक की नोक पर शादी करने के लिए मजबूर किया और उनकी इच्छा के विरुद्ध रोके रखा। मामला बेहद संवेदनशील था क्योंकि यह भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहा था। क्या रहा सरकार का रुख? भारत सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप किया। इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग ने उजमा को सुरक्षित शरण दी और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी की।

पाकिस्तान की अदालत में कानूनी लड़ाई के बाद उजमा को सुरक्षित भारत वापस लाया गया। इस मामले ने दिखाया कि एक आम भारतीय नागरिक के लिए भी भारत सरकार पूरी ताकत से हस्तक्षेप कर सकती है। 2019: विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान मामला क्या था मामला? 14 फरवरी 2019 को पुलवामा आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ जवानों की मौत के बाद भारत ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर हवाई हमला किया। इसके अगले दिन भारत और पाकिस्तान के बीच हवाई संघर्ष हुआ।

इसी दौरान भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान का मिग-21 बाइसन विमान पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वे पाकिस्तानी सेना की हिरासत में चले गए। पाकिस्तान ने अभिनंदन के हिरासत में होने के वीडियो और तस्वीरें जारी कीं, जिसके बाद भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों और युद्धबंदियों से जुड़े नियमों के खिलाफ बताया तथा पाकिस्तान से उनकी सुरक्षित और तत्काल रिहाई की मांग की। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि भारत अपने अधिकारी की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और पाकिस्तान को जिनेवा कन्वेंशन का पालन करना चाहिए।

क्या रहा सरकार का रुख? मोदी सरकार ने इस मुद्दे पर व्यापक कूटनीतिक अभियान चलाया। दुनिया के प्रमुख देशों को स्थिति से अवगत कराया गया और पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा। बढ़ते तनाव और वैश्विक दबाव के बीच पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद में अभिनंदन की रिहाई की घोषणा की। 1 मार्च 2019 को वे अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत लौट आए।

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