जेल कर्मी पर हमले की कहानी निकली झूठी: अदालत ने कैदी को किया बरी; सरकारी पक्ष को जज ने लगाई फटकार
सरकारी पक्ष के मुताबिक, यह घटना दो मार्च 2017 की है। ठाणे सेंट्रल जेल के हाई-सिक्योरिटी बैरक में अरमान खान ने जेल अधिकारी संभाजी पिसे
सरकारी पक्ष के मुताबिक, यह घटना दो मार्च 2017 की है। ठाणे सेंट्रल जेल के हाई-सिक्योरिटी बैरक में अरमान खान ने जेल अधिकारी संभाजी पिसे और दो अन्य कर्मचारियों पर लोहे की पत्ती से हमला कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की कहानी में कई बड़ी कमियां पाईं।
जज ने अपने फैसले में नोट किया कि यह कथित घटना जेल के अंदर हुई थी, जहां कई अन्य कैदी भी मौजूद थे। इसके बावजूद कोर्ट के सामने कोई भी पुख्ता या चश्मदीद सबूत पेश नहीं किया जा सका।मामले की सुनवाई के दौरान जेल प्रशासन का रवैया भी संदिग्ध पाया गया।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी के शरीर पर लगी चोटों के बारे में जेल अधिकारियों ने कोई साफ वजह नहीं बताई। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी का यह दावा सही हो सकता है कि पहले जेल कर्मियों ने उसे पीटा और फिर खुद पर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए यह झूठी एफआईआर दर्ज करा दी।
इसके अलावा जांच अधिकारी को घटना स्थल पर तुरंत जाने की इजाजत नहीं दी गई और मामले का सबसे अहम सबूत यानी सीसीटीवी फुटेज भी छिपा लिया गया। जज ने कहा कि इन सभी वजहों से सरकारी कहानी पर गंभीर संदेह पैदा होता है।
