Lucknow, India

US: 'एआई निर्यात प्रतिबंधों ने बताया तकनीक ही सबसे बड़ा हथियार',श्रीधर वेंबू ने सरकार को दी कीमती सलाह

Published 12 June 2026 · tech

अमेरिकी सरकार के निर्यात नियंत्रण नियमों के कारण एंथ्रोपिक के उन्नत एआई मॉडल्स मिथोस और फेबल को अमेरिका के बाहर के यूजर्स के लिए बैन

अमेरिकी सरकार के निर्यात नियंत्रण नियमों के कारण एंथ्रोपिक के उन्नत एआई मॉडल्स मिथोस और फेबल को अमेरिका के बाहर के यूजर्स के लिए बैन कर दिया गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वेम्बु ने कहा कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि रणनीतिक तकनीकें अब वैश्विक भू-राजनीति को प्रभावित कर रही हैं।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'यह बहुत बड़ी बात है। अमेरिका के बाहर सभी लोगों के लिए मिथोस और फेबल एआई मॉडल्स की पहुंच बंद कर दी गई है।' उन्होंने कहा, 'वैश्वीकरण अब खत्म हो चुका है और भारत को अपना रास्ता खुद बनाना होगा।' वेम्बु ने कहा कि यह घटना भारत के लिए एक संकेत है कि उसे अपने घरेलू तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करना चाहिए।उनका कहना था कि पर्याप्त प्रयासों के साथ इन मॉडल्स को भी प्रभावी बनाया जा सकता है।

वेम्बु ने अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में अधिक निवेश की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक एआई मॉडल तैयार करने के लिए भारी वित्तीय संसाधनों और उन्नत ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) की जरूरत होती है, जो फिलहाल दुनिया के कुछ ही देशों के पास हैं।उनके अनुसार, नई पीढ़ी

के एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करने में दसियों या यहां तक कि सैकड़ों अरब डॉलर तक का निवेश लग सकता है। इसके अलावा आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच भी अब विभिन्न प्रतिबंधों के दायरे में आ रही है। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक एआई कंपनियों की तरह भारी खर्च करने

की बजाय वैकल्पिक और कम लागत वाले अनुसंधान तरीकों पर ध्यान देना चाहिए।वेम्बु ने कहा, 'जोहो लंबे समय से ऐसे वैकल्पिक अनुसंधान एवं विकास तरीकों पर काम कर रहा है, जिनकी लागत काफी कम है।' उन्होंने भरोसा जताया कि लगातार नवाचार और धैर्य के साथ अच्छे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

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