Lucknow, India

रिसर्च और पेटेंट में भारत अव्वल, लेकिन फाइनल प्रोडक्ट बनाने में फिसड्डी: नीति आयोग

Published 21 May 2026 · world

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नीति आयोग का मानना है कि रिसर्च और पेटेंट के क्षेत्र में भारत का प्रदर्शन मजबूत हो रहा है, लेकिन इन रिसर्च और पेटेंट को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने में अपेक्षा के अनुरूप कामयाबी नहीं मिल पा रही है। इनोवेशन के आइडियाज आ रहे हैं

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नीति आयोग का मानना है कि रिसर्च और पेटेंट के क्षेत्र में भारत का प्रदर्शन मजबूत हो रहा है, लेकिन इन रिसर्च और पेटेंट को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने में अपेक्षा के अनुरूप कामयाबी नहीं मिल पा रही है। इनोवेशन के आइडियाज आ रहे हैं, प्रोटोटाइप बन रहे हैं, लेकिन वह वैश्विक स्तर के अंतिम उत्पाद में तब्दील नहीं हो पा रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि भारत में टेक्लोनाजी ट्रांसफर मैकेनिज्म की कमी है और बौद्धिक संपदा के प्रबंधन को लेकर स्पष्टता नहीं है। गत वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में 1,43,729 पेटेंट फाइल किए गए जो पूर्व के वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले 30 प्रतिशत अधिक है।

जानकारों का कहना है कि 10 प्रतिशत से कम पेटेंट ही अंतिम उत्पाद में तब्दील हो पाते हैं। भारत रिसर्च, पेटेंट में मजबूत, व्यावसायिक उत्पाद में कमजोर आयोग का मानना है कि सीमित फंड और विभिन्न प्रकार के इंसेंटिव की कमी से अधिकतर रिसर्च प्रयोगशाला तक ही सीमित रह जाते हैं। ऐसे में आयोग ने सुझाव दिया है कि पेटेंट और इनोवेशन (नवाचार) को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने के लिए औद्योगिक क्लस्टर में ही रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (आरडीआइ) क्लस्टर बनाए जाने चाहिए। रिसर्च को अंतिम उत्पाद में तब्दील करने में मदद के लिए विज्ञान निधि नामक डिजिटल फेलोशिप प्लेटफार्म भी बनाए जा सकते हैं। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में इनोवेशन, विज्ञान व तकनीक के योगदान को लेकर नीति आयोग ने सरकार से यह सिफारिश की है।

खबरें और भी आरएंडडी पर भारत को जीडीपी का दो प्रतिशत खर्च करना चाहिए नीति आयोग ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि रिसर्च और डेवलपमेंट (आरएंडडी) पर भारत को अपनी जीडीपी का दो प्रतिशत खर्च करना चाहिए जबकि अभी यह खर्च जीडीपी का 0.5 प्रतिशत भी नहीं है। अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया जैसे देश आरएंडडी व इनोवेशन पर अपने जीडीपी का दो प्रतिशत से अधिक खर्च करते हैं। नीति आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा है कि औद्योगिक क्लस्टर में ही आरडीआइ क्लस्टर की स्थापना की जा सकती है। आरडीआइ क्लस्टर में विज्ञान व तकनीक से जुड़े विभिन्न फर्म के साथ सरकारी एजेंसी, विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के केंद्र और स्टार्टअप शामिल होंगे।

राज्यों में बनने वाले इस प्रकार के आरडीआइ क्लस्टर से सभी केंद्रीय सार्वजनिक कंपनियों व एमएसएमई को भी जुड़ना चाहिए। सरकारी नीति और उस अमल के लिए बनाया जाए संस्थान आयोग ने इंडस्ट्री से जुड़े रिसर्च और पीएचडी के बाद के रिसर्च को समर्थन देने के लिए विज्ञान निधि नामक एक डिजिटल फेलोशिप प्लेटफार्म स्थापित करने की भी सिफारिश की है। आयोग ने कहा है कि वैज्ञानिक, रिसर्चर और विश्वविद्यालय शिक्षकों को करियर के मध्य में प्रशिक्षण दिलाने का कार्यक्रम चलाने की जरूरत है।

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