अमेरिकी हमलों पर भड़का भारत: US राजनयिक को फिर किया तलब, विदेश मंत्रालय ने दर्ज कराया कड़ा विरोध
भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि नागरिक जहाजों के खिलाफ इस प्रकार के घातक बल का उपयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि नागरिक जहाजों के खिलाफ इस प्रकार के घातक बल का उपयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य है। राजनयिक वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष को स्पष्ट रूप से बताया गया कि इस तरह की हिंसक घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं। यह क्षेत्रीय स्थिरता को भी सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। भारत ने अमेरिका से कहा है कि वह भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए, जिससे नागरिक जीवन को कोई नुकसान पहुंचे।बता दें कि इन अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई है।
भारत सरकार ने यह स्वीकार किया है कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों को निशाना बनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन हमलों की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ये हमले अमेरिकी नौसेना की तरफ से हुए थे। भारत ने कहा कि इस तरह से नागरिकों की जान जाना पूरी तरह से टाला जा सकता था।अमेरिकी सेना ने इस हफ्ते एक के बाद एक तीन जहाजों को निशाना बनाया। पहला हमला आठ जून को पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर 'मारिवेक्स' पर हुआ।
इस पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। यह जहाज पूरी तरह ठप हो गया, लेकिन सभी को सुरक्षित बचा लिया गया। दूसरा हमला 10 जून को पलाऊ के ही दूसरे टैंकर सेटेबेलो पर हुआ। इस हमले में जहाज पर मौजूद 24 भारतीयों में से तीन नाविकों की मौत हो गई। तीसरा हमला गुरुवार 11 जून को गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले टैंकर 'जलवीर' पर हुआ। इस पर 20 भारतीय सवार थे।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इनमें से दो जहाजों पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) की ओर से प्रतिबंध लगाए गए थे।
वहीं एक अन्य जहाज नियमों का पालन नहीं कर रहा था। यह अमेरिकी एजेंसी ईरानी और रूसी तेल बेचने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाने का काम करती है।
