'दुश्मनी निभाओ, लेकिन मर्यादा मत लांघो': कीर्ति आजाद ने निशिकांत को दी नसीहत, कहा- काकोली भी होंगी बेनकाब
कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निशिकांत दुबे के एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि आपके साथ मेरा कोई व्यक्तिगत झगड़ा
कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निशिकांत दुबे के एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि आपके साथ मेरा कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है। उन्होंने लिखा, 'आपको मेरा आशीर्वाद है। मेरा सिर्फ एक सुझाव है कि दुश्मनी उतनी ही निभाओ जिससे आपसी मतभेद व्यक्तिगत रंजिश में न बदलें।' इसके साथ ही आजाद ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की तरफ से चलाए जा रहे 'ऑपरेशन लोटस' की पुष्टि करने का दावा भी किया। उन्होंने कहा कि पहले भूपेंद्र यादव, फिर शुभेंदु अधिकारी और अब मेरे छोटे भाई निशिकांत दुबे सक्रिय हैं। प्रत्यक्ष को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है। हम सब संसद में मिलेंगे।इससे पहले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कीर्ति आजाद के उन आरोपों का खंडन किया था, जिसमें उनके घर को दलबदल का केंद्र बताया गया था। दुबे ने कीर्ति आजाद को चुनौती देते हुए कहा कि आप मेरे घर के बाहर या अंदर कहीं भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। दुबे ने अपने पुराने रिश्तों की दुहाई देते हुए कहा कि मैं दस साल तक भाजपा में आपके साथ सांसद रहा हूं।
आपके दिवंगत पिता मेरे अभिभावक थे। इसके अलावा आपका पैतृक गांव गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में आता है, जहां के मतदाताओं ने 2009 से 2024 तक मुझे हमेशा 99 फीसदी वोट दिए हैं। इसलिए मेरे घर पर आपका पूरा अधिकार है। यह सरकारी आवास गोड्डा की जनता का उपहार है।यह पूरा विवाद टीएमसी के भीतर बड़े विद्रोह से जुड़ा है। पार्टी के 19 बागी सांसदों ने 18 मई को लोकसभा स्पीकर को अलग बैठने की व्यवस्था के लिए नाम सौंपे हैं, जिससे पार्टी में टूट तय मानी जा रही है। इस सूची में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदार, शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मलिया और पार्थ भौमिक जैसे बड़े नाम शामिल हैं। हाल ही में दिल्ली के 20 राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित पार्थ भौमिक के आवास से टीएमसी के पोस्टर हटाकर राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के घर भेज दिए गए हैं।
इसके अलावा राज्यसभा से सुस्मिता देव (10 जून), सुखेंदु शेखर राय (8 जून) और प्रकाश चिक बड़ाइक (11 जून) इस्तीफा दे चुके हैं। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी का गुट 64 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है। इन बागी नेताओं की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और शुभेंदु अधिकारी से मुलाकातों ने एनडीए में शामिल होने की अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि, दलबदल कानून की दसवीं अनुसूची के तहत कानूनी मान्यता के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है।इस राजनीतिक दंगल में कीर्ति आजाद ने बागी नेताओं पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी नेता काकोली घोष दस्तीदार को पहले पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते कैमरे में पकड़ा गया था। आज वे किस मुंह से ममता बनर्जी पर सवाल उठा रही हैं। आजाद ने दावा किया कि वे बहुत जल्द इन सभी बागियों का पर्दाफाश करेंगे और उन्हें 10 लाख रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ेंगे, क्योंकि जानकारी उनके अपने खेमे से ही आएगी। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी पर भी निशाना साधा और कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी से अश्लील वीडियो विवाद में निकाले जाने के बाद वे युवराज अभिषेक बनर्जी के चक्कर काटते थे।
उन्हें सांसद, विधायक और ट्रेड यूनियन अध्यक्ष बनाया गया, फिर भी वे अहसानफरामोश निकले। कल्याण बनर्जी के बयान पर उन्होंने कहा कि वे भावुक व्यक्ति हैं, लेकिन दीदी से उनके संबंध अच्छे हैं।आजाद ने भाजपा पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि पहली बार सांसद बने बापी हलदार और ग्रामीण पृष्ठभूमि की मिताली बाग जैसे सीधे-साधे नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की गई है। उनके परिवारों को डरा-धमकाकर, सुरक्षा हटाकर और पुलिस का पहरा बिठाकर जबरन दलबदल के कागज पर दस्तखत कराए जा रहे हैं। सूची में 14 से 18 नंबर के नाम अलग स्याही में हैं, जिनमें तीन मुस्लिम सांसद भी शामिल हैं, क्योंकि भाजपा को दो-तिहाई बहुमत जुटाना है। आज़ाद ने कहा कि उनकी अपनी सुरक्षा भी हटा ली गई है, लेकिन वे इन हरकतों के आगे नहीं झुकेंगे।
