सायोनी से यूसुफ तक: इन सांसदों ने चिठ्ठी पर किए थे हस्ताक्षर, पहली बार नाम आए सामने, पाला बदलने पर संशय बरकरार
क्या हस्ताक्षर करने वाले सांसदों की सूची ने बढ़ा दी राजनीतिक हलचल? क्या यह कदम तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती नाराजगी का परिणाम है? राज्यसभा
क्या हस्ताक्षर करने वाले सांसदों की सूची ने बढ़ा दी राजनीतिक हलचल? क्या यह कदम तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती नाराजगी का परिणाम है? राज्यसभा इस्तीफों से क्या और मजबूत हुई असंतोष की चर्चा? क्या पाला बदलने की अटकलों में कोई सच्चाई है? बागी सांसदों की कुछ भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की खबरों के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हुई हैं। इसके चलते यह चर्चा शुरू हुई कि क्या यह समूह भविष्य में कोई नया राजनीतिक फैसला ले सकता है। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने भाजपा नीत एनडीए में शामिल होने या किसी अन्य दल के साथ जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में फिलहाल इतना ही स्पष्ट है कि असहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों के नाम सामने आ गए हैं, लेकिन उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर संशय बरकरार है।
तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरा यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकता है। सांसदों के हस्ताक्षरों वाली सूची सामने आने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह असहमति केवल संसदीय व्यवस्था तक सीमित रहेगी या फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की भूमिका तैयार करेगी। सूत्रों के अनुसार 18 मई को लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को भेजे गए एक असहमति पत्र पर तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। इस पत्र में लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की गई थी। अब जिन 19 सांसदों के नाम सामने आए हैं उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदार, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपदा सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक शामिल बताए जा रहे हैं।इन नामों के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
सूची में कई ऐसे सांसद शामिल हैं जिन्हें तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक साथ इतने सांसदों का किसी असहमति पत्र पर हस्ताक्षर करना पार्टी के भीतर गहरे असंतोष का संकेत हो सकता है। हालांकि अभी तक इन सांसदों की ओर से किसी नए राजनीतिक मंच या दल के गठन की घोषणा नहीं की गई है।पार्टी के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए इस कदम को संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के प्रदर्शन और संगठनात्मक फैसलों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। ऐसे माहौल में सांसदों के एक बड़े समूह का असहमति पत्र पर हस्ताक्षर करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर संवाद और नेतृत्व को लेकर कुछ वर्गों में असंतोष मौजूद है।तृणमूल कांग्रेस को हाल के दिनों में राज्यसभा में भी झटके लगे हैं।
प्रकाश चिक बड़ाईक, सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर राय जैसे नेताओं के इस्तीफों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। इन इस्तीफों और अब सांसदों के हस्ताक्षर वाले पत्र को जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इन घटनाओं को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
