नटराजन का नामांकन रद्द: कांग्रेस समर्थकों का फूटा गुस्सा, Cji-cec को चिट्ठी लिख निष्पक्षता पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता अवनी बंसल की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए इस पत्र में चुनाव आयोग और देश की शीर्ष अदालत
कांग्रेस प्रवक्ता अवनी बंसल की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए इस पत्र में चुनाव आयोग और देश की शीर्ष अदालत से दखल देने की मांग की गई है। पत्र में दलील दी गई है कि किसी भी उम्मीदवार का नामांकन रद्द करने की शक्ति का उपयोग अत्यंत संयम, पूर्ण पारदर्शिता और कानून के प्रति अटूट निष्ठा के साथ किया जाना चाहिए। हस्ताक्षरकर्ताओं का दावा है कि इस मामले में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के वैधानिक सुरक्षा उपायों और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार किसी भी नामांकन को तब तक वैध माना जाना चाहिए जब तक कि उसके विपरीत कोई पुख्ता सबूत न हो।इस खुले पत्र में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 36 का विशेष रूप से हवाला दिया गया है। पत्र के मुताबिक, नामांकन पत्रों को ऐसे आधारों पर खारिज नहीं किया जा सकता जो बहुत गंभीर या ठोस प्रकृति के न हों। इसके साथ ही चुनाव आयोग की 'रिटर्निंग ऑफिसर्स हैंडबुक' का जिक्र करते हुए यह दावा भी किया गया है कि केवल इस आरोप पर नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता कि हलफनामे में कोई गलत जानकारी दी गई है।
पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि यह घटना केवल एक उम्मीदवार या एक राजनीतिक दल की नहीं है, बल्कि यह देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के संवैधानिक वादे से जुड़ी है।पूरा विवाद मीनाक्षी नटराजन के हलफनामे में जानकारी छिपाने के आरोपों के बाद शुरू हुआ। राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के आदेश के अनुसार, नटराजन का फॉर्म 26 अधूरा पाया गया, जिसमें एक अदालती शिकायत का जिक्र नहीं था। मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के मुताबिक, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार महेश केवट ने शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने तेलंगाना में दर्ज एक मामले की जानकारी अपने हलफनामे में नहीं दी है।
इस फैसले के खिलाफ मीनाक्षी नटराजन ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बता दें कि मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है।
