SC Updates: अनुकंपा नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मां के खिलाफ हत्या की कार्यवाही का बेटे पर असर नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मृत कर्मचारी की विधवा के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही का इस्तेमाल उनके बेटे की अनुकंपा नियुक्ति की मांग को खारिज करने
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मृत कर्मचारी की विधवा के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही का इस्तेमाल उनके बेटे की अनुकंपा नियुक्ति की मांग को खारिज करने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसके लिए हरियाणा सरकार के नियमों का हवाला दिया। इसके साथ ही जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने अतुल चौहान की अपील को मंजूरी दे दी। अतुल की अनुकंपा नियुक्ति की मांग को तब खारिज कर दिया गया था जब उनकी मां पर हरियाणा में सरकारी बेसिक स्कूल टीचर रहे उनके पिता की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा।
शीर्ष अदालत ने कहा, प्रतिवादी (सरकार) के लिए अपीलकर्ता की अनुकंपा नियुक्ति की मांग पर उसके गुण-दोष के आधार पर विचार करने और निर्णय लेने में कोई कानूनी बाधा नहीं है, बशर्ते यह 2019 के नियमों के तहत निर्धारित पात्रता शर्तों और आवश्यकताओं के अनुसार हो। अदालत ने कहा कि ऐसी कार्यवाही के दौरान लाभों को निलंबित करने वाला हरियाणा का नियम केवल वित्तीय सहायता पर लागू होता है, नियुक्तियों पर नहीं।सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें अतुल चौहान के मामले में हरियाणा सिविल सेवा (दया के आधार पर आर्थिक सहायता या नियुक्ति) नियम, 2019 के नियम 23(1) को लागू करने को सही ठहराया गया था।
साथ ही, कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के भीतर मामले के गुण-दोष के आधार पर उसकी चौहान की अर्जी पर विचार करें।अतुल के पिता, गजेंद्र सिंह चौहान की सितंबर, 2021 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। बाद में गजेंद्र की पत्नी, पुष्पा देवी पर उनकी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया। हालांकि, अक्तूबर, 2024 में एक ट्रायल कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन उनके बरी होने के फैसले के खिलाफ अपील अब भी लंबित है।अधिकारियों ने नियम 23(1) का हवाला देते हुए दया के आधार पर नियुक्ति के लिए अतुल की अर्जी पर कार्रवाई करने से इन्कार कर दिया था।
इस नियम के तहत, अगर परिवार का कोई सदस्य मृतक कर्मचारी की हत्या या हत्या के लिए उकसाने का आरोपी हो, तो दया के आधार पर मिलने वाली आर्थिक सहायता रोक दी जाती है।
