Lucknow, India

कोटा मॉडल से खान सर तक: कितनी बड़ी है भारत की कोचिंग इंडस्ट्री, तीन दशक में कैसे बदली देश की शिक्षा व्यवस्था?

Published 9 June 2026 · education

कोचिंग उद्योग कैसे एक समानांतर तंत्र बना? भारत में कोचिंग उद्योग का सबसे बड़ा प्रतीक राजस्थान का कोटा शहर रहा है। आज जिस कोटा को

कोचिंग उद्योग कैसे एक समानांतर तंत्र बना? भारत में कोचिंग उद्योग का सबसे बड़ा प्रतीक राजस्थान का कोटा शहर रहा है। आज जिस कोटा को देश की कोचिंग राजधानी कहा जाता है, उसकी कहानी 1985 में शुरू हुई थी। उस समय जे.के. सिंथेटिक्स में इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले वी.के. बंसल ने अपने घर से छात्रों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत में वे सातवीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाते थे, बाद में दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को भी पढ़ाने लगे। 1985 में उनके एक छात्र ने IIT-JEE परीक्षा पास कर ली। इस सफलता ने वी.के. बंसल को एक नई दिशा दिखाई।

उन्होंने बंसल क्लासेज की स्थापना की, जो आगे चलकर देश के सबसे बड़े कोचिंग संस्थानों में से एक बन गया। इसने कोटा में एक नई शैक्षणिक अर्थव्यवस्था को जन्म दिया। देखते ही देखते शहर में दर्जनों बड़े संस्थान खड़े हो गए और कोटा इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का राष्ट्रीय केंद्र बन गया। आज देश के कई शहर इस मॉडल को दोहरा रहे हैं। इसी तरह दिल्ली यूपीएसी की तैयारी का देश में सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। पटना क्यों बना नया कोचिंग हब? पिछले दो दशक में पटना तेजी से उभरते कोचिंग केंद्र के रूप में सामने आया है।

यहां एसएससी, रेलवे, बैंकिंग, बीपीएससी और अन्य सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले सैकड़ों संस्थान सक्रिय हैं। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों छात्र यहां आते हैं। खान सर, आनंद कुमार, रोशन आनंद जैसे शिक्षकों का उदय भी इसी दौर में हुआ। कोचिंग उद्योग में बड़े बदलाव कब आए? 2015-16 के दौर में इंटरनेट डेटा सस्ता होने के बाद कोचिंग उद्योग में भी बदलाव की शुरुआत हुई। जब बायजू, अनएकेडमी जैसे ऑनलाइन कोचिंग प्लेटफॉर्म चर्चित होने लगे। 2020 की कोरोना महामारी कोचिंग उद्योग के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई। जब ऑफलाइन कक्षाएं बंद हुईं तो संस्थानों को ऑनलाइन माध्यम अपनाना पड़ा।

यूट्यूब, मोबाइल एप, लाइव क्लास और रिकॉर्डेड लेक्चर मुख्य माध्यम बन गए। ऑनलाइन पढ़ाने वाले कई शिक्षक भी इसी दौर में सुर्खियों में आए। इनमें अलख पांडेय, खान सर जैसे नाम शामिल थे। कई शिक्षक सोशल मीडिया स्टार बन गए। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऑनलाइन कोचिंग की वृद्धि ऑफलाइन से भी तेज होगी। इस बदलाव का क्या असर हुआ? 1. शिक्षा भौगोलिक सीमाओं से मुक्त हो गई। 2. छोटे शहरों के छात्रों को बड़े शिक्षकों तक पहुंच मिल गई। 3. शिक्षकों की लोकप्रियता राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई।

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