Lucknow, India

मीनाक्षी घबराकर बाहर भागी, सीनियर नेताओं को बुलाया:कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन रद्द होने की इनसाइड स्टोरी, एक्सपर्ट बोले- रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला सही नहीं

Published 9 June 2026 · politics

मप्र राज्यसभा चुनाव के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा सियासी उलटफेर सामने आया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र (पर्चा) खारिज

मप्र राज्यसभा चुनाव के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा सियासी उलटफेर सामने आया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र (पर्चा) खारिज कर दिया गया है, जिसके बाद राज्य की राजनीति गर्मा गई इस फैसले के बाद जहां कांग्रेस ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया है, वहीं बीजेपी इसे पूरी तरह न्यायसंगत बता रही है। बता दें राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। दो सीटें बीजेपी के खाते में जाना तय है। तीसरी सीट पर बीजेपी ने महेश केवट को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। केवट और मीनाक्षी के बीच मुकाबला था। अब नामांकन रद्द होने के बाद केवट का राज्यसभा में जाने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।

आखिर रिटर्निंग ऑफिसर के बंद कमरे में क्या हुआ? किस नियम के तहत मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज किया गया? और इस फैसले में क्या कानूनी पेंच हैं? पढ़िए इस पूरे घटनाक्रम की इनसाइड स्टोरी और एक्सपर्ट एनालिसिस... दोपहर 2 बजे से शाम 6:30 बजे तक: रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे का घटनाक्रम तय कार्यक्रम के मुताबिक 9 जून को राज्यसभा चुनाव के नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) हुई। दोपहर 2 बजे विधानसभा में रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के कमरे में गहमागहमी शुरू हुई। मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर RO का फैसला रिटर्निंग ऑफिसर के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना की अदालत में निजी परिवाद दायर था।

कोर्ट ने 17 सितंबर 2025 को समन जारी कर उन्हें पेश होने का आदेश दिया था। रिटर्निंग ऑफिसर की तीन टिप्पणियां थीं.. अंतिम निर्णय: आदेश में कहा गया कि अधूरा एफिडेविट (फॉर्म 26) जमा करना और महत्वपूर्ण तथ्य छिपाना सिद्ध होता है। इसलिए हैंडबुक के अध्याय 6 के बिंदु 10(xiii) के तहत नामांकन निरस्त किया गया। एक्सपर्ट व्यू: फैसले पर क्यों उठ रहे हैं सवाल? पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदेव इसराणी के अनुसार, नामांकन रद्द करने का फैसला नियमों के अनुसार पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। उन्होंने हैंडबुक के आधार पर तीन कानूनी पेंच बताए। अब कांग्रेस के पास क्या कानूनी विकल्प हैं?

विकल्प 1: कांग्रेस चुनाव आयोग से यह कहते हुए समीक्षा मांग सकती है कि यह केवल निजी परिवाद था, औपचारिक FIR नहीं। इसलिए शपथ पत्र में इसका उल्लेख अनिवार्य नहीं था। विकल्प 2: कांग्रेस हाई कोर्ट में याचिका दायर कर RO के आदेश को चुनौती दे सकती है। यह सबसे त्वरित और व्यावहारिक कानूनी विकल्प माना जा रहा है। विकल्प 3: चुनाव और परिणाम के बाद कांग्रेस इलेक्शन पीटिशन के जरिए परिणाम को चुनौती दे सकती है, हालांकि यह लंबी प्रक्रिया होगी।

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