ट्रैकिंग, टेंट और मिस्ट्री... 9 दिन बाद भी नहीं मिला बबीता का कोई सुराग
ऊंची पहाड़ियों पर उस रात अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी. दयारा बुग्याल की ढलानों से टकराती ठंडी हवाएं जंगल के बीच ऐसे सरसराहट पैदा
ऊंची पहाड़ियों पर उस रात अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी. दयारा बुग्याल की ढलानों से टकराती ठंडी हवाएं जंगल के बीच ऐसे सरसराहट पैदा कर रही थीं, मानो कोई अनदेखा रहस्य खुद को छिपाने की कोशिश कर रहा हो.
वहां दूर-दूर तक सिर्फ अंधेरा था, जबकि बबीता समेत उन तीन दोस्तों के लिए ये ट्रैकिंग के रोमांच का हिस्सा था. वो तीनों वहां एक टेंट लगाकर रात गुजारने के लिए रुके थे.
लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ घंटों बाद यही रोमांच एक ऐसे रहस्य में बदल जाएगा, जो सबको हैरान कर देगा. पढ़ें एक
ऐसी वारदात की कहानी, जो पुलिस के लिए किसी पहेली से कम नहीं है.
