रामलिंगम हत्याकांड: NIA ने PFI के चार सदस्यों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट, अपराधियों को पनाह देने का आरोप
यह हमला सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और आतंक फैलाने के उद्देश्य से रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। उन पर बीएनएस अधिनियम की धारा
यह हमला सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और आतंक फैलाने के उद्देश्य से रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। उन पर बीएनएस अधिनियम की धारा 61(2) और बीएनएस अधिनियम की धारा 249 (संधि अधिनियम के साथ) के तहत आरोप लगाए गए हैं। पांच फरवरी 2019 को पक्कु विनायकम थोप्पू के पास जबरन धर्म परिवर्तन कराने से रोकने की कोशिश करने पर पीएफआई सदस्यों ने रामलिंगम की बेरहमी से हत्या कर दी थी। दोनों के बीच कहासुनी हुई थी। गुर्गों को छह साल पनाह दी एनआईए की जांच (मामला आरसी-06/2019/एनआईए/डीएलआई) में पता चला कि चारों आरोपियों ने मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन नाम के दो जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले गुर्गों को लगभग छह साल तक पनाह दी थी।
इन चारों आरोपियों को यह मालूम था कि बुरहानुद्दीन और नबील हसन, रामलिंगम की हत्या में शामिल हैं। पहले 18 आरोपियों के खिलाफ दायर किया आरोपपत्र इससे पहले, एनआईए ने इस मामले में छह फरार जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले गुर्गों समेत 18 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। बाद में एनआईए ने चार गुर्गों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में दो अन्य पनाह देने वालों, मोहम्मद अली जिन्ना और इम्तथुल्ला को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ मई 2025 और फरवरी 2026 में आरोपपत्र दायर किए गए थे।
यह हमला सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और आतंक फैलाने के उद्देश्य से रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। उन पर बीएनएस अधिनियम की धारा 61(2) और बीएनएस अधिनियम की धारा 249 (संधि अधिनियम के साथ) के तहत आरोप लगाए गए हैं। पांच फरवरी 2019 को पक्कु विनायकम थोप्पू के पास जबरन धर्म परिवर्तन कराने से रोकने की कोशिश करने पर पीएफआई सदस्यों ने रामलिंगम की बेरहमी से हत्या कर दी थी। दोनों के बीच कहासुनी हुई थी।एनआईए की जांच (मामला आरसी-06/2019/एनआईए/डीएलआई) में पता चला कि चारों आरोपियों ने मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन नाम के दो जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले गुर्गों को लगभग छह साल तक पनाह दी थी।
इन चारों आरोपियों को यह मालूम था कि बुरहानुद्दीन और नबील हसन, रामलिंगम की हत्या में शामिल हैं।
