Lucknow, India

सुप्रीम कोर्ट में बड़ी याचिका: सिर्फ पहचान का जरिया बने आधार, नागरिकता या पते का सबूत नहीं

Published 20 May 2026 · politics

यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है। इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और भारत निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है कि आधार का उपयोग केवल पहचान साबित करने के लिए हो, न कि नागरिकता, अधिवास, पता

यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है। इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और भारत निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है कि आधार का उपयोग केवल पहचान साबित करने के लिए हो, न कि नागरिकता, अधिवास, पता या जन्मतिथि प्रमाणित करने के लिए।अधिवक्ता अश्वनी दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में नए मतदाता पंजीकरण फॉर्म -6 में आधार के उपयोग पर गंभीर कानूनी सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आधार को जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार करना आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के प्रावधानों के पूरी तरह खिलाफ है।याचिका में कहा गया है कि आधार अधिनियम की धारा नौ साफ तौर पर यह बताती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है।

इसके अलावा, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने भी 22 अगस्त 2023 की अपनी अधिसूचना में साफ किया था कि आधार केवल पहचान का प्रमाण है, नागरिकता या जन्मतिथि का नहीं।याचिकाकर्ता ने जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए कहा कि आज स्कूलों में दाखिले, संपत्ति की खरीद, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आधार का इस्तेमाल धड़ल्ले से उम्र और नागरिकता के प्रमाण के रूप में हो रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इसका उपयोग नए मतदाता पहचान पत्र के आवेदन (फॉर्म-6) में भी पते और जन्मतिथि के रूप में किया जा रहा है।

याचिका में डर जताया गया है कि इस ढिलाई का फायदा उठाकर घुसपैठिए और अवैध अप्रवासी भी आधार के जरिए विभिन्न सरकारी दस्तावेज हासिल कर रहे हैं।याचिका में दलील दी गई है कि फॉर्म-6 के तहत वर्तमान सत्यापन प्रणाली बेहद कमजोर है। इसके कारण उचित सहायक दस्तावेजों के बिना भी लोग मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं, जिससे देश

की लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होने का खतरा है। सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि चुनावी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले सत्यापन की व्यापक समीक्षा की जाए। इसके साथ ही, इन सुधारों की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की जाए, जिसमें साइबर सुरक्षा और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल हों।

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