Lucknow, India

राजस्थान-इबोला वायरस संदिग्ध के साथ आए पैसेंजर्स भी क्वारंटाइन:19 साल की युवती में मिले संक्रमण जैसे लक्षण, जयपुर घूमने आई थी

Published 5 June 2026 · india

राजस्थान में इबोला वायरस का पहला संदिग्ध केस मिला है। युगांडा से जयपुर घूमने आई 19 साल की युवती में इबोला संक्रमण जैसे लक्षण मिले हैं। युवती शुक्रवार (5 जून) सुबह एयर अरेबिया एयरलाइंस की फ्लाइट से शारजाह से जयपुर पहुंची। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग में वो संदिग्ध मिली। वो राजस्थान

राजस्थान में इबोला वायरस का पहला संदिग्ध केस मिला है। युगांडा से जयपुर घूमने आई 19 साल की युवती में इबोला संक्रमण जैसे लक्षण मिले हैं। युवती शुक्रवार (5 जून) सुबह एयर अरेबिया एयरलाइंस की फ्लाइट से शारजाह से जयपुर पहुंची। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग में वो संदिग्ध मिली। वो राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) में एडमिट है। उसे आइसोलेशन (दूसरे मरीजों से अलग) में रखा गया है। फ्लाइट में उसके साथ आए दूसरे पैसेंजर्स को भी घर में ही अलग रहने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जांच के लिए पुणे भेजे सैंपल RUHS हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने बताया कि फिलहाल युवती में इबोला वायरस संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। इबोला संक्रमण से मिलते-जुलते लक्षण पाए गए हैं। केवल लक्षणों के आधार पर इसे इबोला नहीं माना जा सकता है। डॉ मोहनीश ग्रोवर ने बताया कि युवती का एक सैंपल टेस्ट के लिए पुणे भेजा गया है। दूसरा सैंपल 48 घंटे बाद भेजा जाएगा। दोनों सैंपल की जांच होने तक युवती को क्वारंटाइन रखा जाएगा।

अगर टेस्ट पॉजिटिव आता है तो 21 दिन क्वारंटाइन रखकर इलाज किया जाएगा। युवती को क्रिटिकल केयर ब्लॉक में आइसोलेट किया गया है। जयपुर घूमने आई थी युवती डॉ मोहनीश ग्रोवर ने बताया कि जयपुर एयरपोर्ट पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा निदेशालय की टीम ने 19 साल की युवती को संदिग्ध माना था। उनकी मेडिकल हिस्ट्री में एक महीने से पेट में दर्द और भूख न लगने की शिकायत थी। ऐसे में मेडिकल रिपोर्ट और कंडीशन को देखकर सस्पेक्ट माना। अभी फिलहाल युवती के सिर में दर्द है। युवती जयपुर घूमने आई थी। उसके साथ आए पैसेंजर्स को भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मरीज के उपचार के लिए टीम बनाई RUHS के प्रिंसिपल डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने बताया कि जब मरीज को सस्पेक्ट के रूप में लाया गया था। तब एयरपोर्ट से लेकर हॉस्पिटल तक पूरी तरह से बैरिकेडिंग की गई थी ताकि किसी तरीके से मरीज एक्सपोज न हो। एंबुलेंस से हॉस्पिटल आते ही उसको क्रिटिकल केयर ब्लॉक के इमरजेंसी एरिया में शिफ्ट किया गया।

इलाज करने वाली टीम में मेडिसिन, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सर्जरी रेस्पिरेट्री मेडिसिन, बायोकेमेस्ट्री सहित पूरी टीम और टास्क फोर्स इस केस के लिए तैयार किया गया। इस केस की मॉनिटरिंग के लिए स्पेशल रूप से 24 घंटे के लिए राउंड द क्लॉक डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई है। नर्सिंग स्टाफ से लेकर क्लीनिंग स्टाफ तक की ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। भारत में अब तक एक भी केस नहीं पूरी दुनिया में इबोला वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 900 हो गई है। इसके कारण कांगो में पिछले 20 दिनों में 200 लोगों की मौत हो चुकी है। इबोला वायरस का ‘बुंडीबुग्यो’ वेरिएंट तेजी से फैल रहा है। इसलिए WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। भारत में अभी तक इबोला वायरस का कोई मामला नहीं दर्ज हुआ है। भारत सरकार ने क्या एडवाइजरी जारी की है? इबोला वायरस के संबंध में भारत सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी में 4 मुख्य बातें कही गई हैं- इबोला पहली बार 1976 में सामने आया पूरी दुनिया में इबोला वायरस डिसीज (EVD) से पीड़ित मरीजों में 25% से 90% की मौत होती है।

इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में इसके मामले मिले थे। कांगो में जिस इलाके में यह वायरस मिला, उसके पास बहने वाली इबोला नदी के नाम पर इसका नाम रखा गया। यह जानलेवा बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के दूसरे तरल पदार्थ के संपर्क से फैलती है। …. फिजिकल हेल्थ- इबोला वायरस बना ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी:भारत भी अलर्ट पर, क्या आपको भी खतरा है, डॉक्टर से जानें हर सवाल का जवाब ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ (WHO) ने इबोला वायरस को ‘ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी’ घोषित किया है। इसके बाद भारत सरकार ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। पूरी खबर पढ़िए…

Read full story on TheBriefWire

Loading…