भारत की घरेलू बिजली की खपत में भारी उछाल, भीषण गर्मी और AC ने बढ़ाया डिमांड
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में पीक पावर डिमांड 270 गीगावॉट के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। देश के इतिहास में एक साथ इतनी बिजली की जरूरत पहले कभी नहीं पड़ी थी। यह बढ़ती मांग केवल आर्थिक गतिविधियों या आबादी का नतीजा नहीं है, बल्कि इसका सबसे बड़ा
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में पीक पावर डिमांड 270 गीगावॉट के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। देश के इतिहास में एक साथ इतनी बिजली की जरूरत पहले कभी नहीं पड़ी थी। यह बढ़ती मांग केवल आर्थिक गतिविधियों या आबादी का नतीजा नहीं है, बल्कि इसका सबसे बड़ा कारण बदलता मौसम है। भीषण गर्मी और खासकर रात के बढ़ते तापमान के कारण करोड़ों घरों में एयर कंडीशनर और कूलर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। नतीजतन, बिजली की खपत अब सिर्फ दिन में ही नहीं, बल्कि देर रात तक बेहद ऊंचे स्तर पर बनी रहती है। भारत की पीक पावर डिमांड 270 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर को छू गई है, यानी एक साथ पूरे देश में जितनी बिजली की जरूरत पड़ रही है, वह इतिहास में कभी इतनी नहीं रही। यह बिजली की मांग केवल बढ़ती आबादी या आर्थिक गतिविधियों का नतीजा नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बदलता मौसम है। बढ़ती गर्मी और खासकर रात के समय बढ़ते तापमान ने करोड़ों घरों में एयर कंडीशनर और कूलर की निर्भरता बढ़ा दी है।
इससे बिजली की खपत अब केवल दिन के समय नहीं, बल्कि देर रात तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है। खबरें और भी रातों में भी बिजली की बढ़ी अधिक मांग कभी भारत में बिजली की सबसे ज्यादा खपत दिन में उद्योगों और शाम को घरों में होती थी। मांग का पैटर्न काफी हद तक तय रहता था। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। भीषण गर्मी और बढ़ती एसी निर्भरता ने बिजली की मांग को पूरी तरह नया रूप दे दिया है। अब दोपहर से शुरू होकर देर रात तक बिजली की खपत ऊंची बनी रहती है। पहले जहां सूरज ढलने के बाद मांग धीरे-धीरे कम हो जाती थी, वहीं अब गर्म रातें लोगों को एसी और कूलर लगातार चलाने के लिए मजबूर कर रही हैं। यही वजह है कि देश में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। मई 2026 में भारत की पीक पावर डिमांड 270 गीगावाट से ऊपर पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
9 साल में 71% बढ़ी घरेलू बिजली खपत बिजली की बढ़ती मांग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2015 में घरेलू बिजली खपत जहां करीब 2.38 करोड़ यूनिट थी, वहीं 2024 तक यह बढ़कर लगभग 4.08 करोड़ यूनिट पहुंच गई। यानी सिर्फ नौ वर्षों में करीब 71% की बढ़ोतरी। समस्या यह है कि देश के कई ट्रांसफॉर्मर और वितरण तंत्र एक दशक पहले की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। तब यह अनुमान नहीं लगाया गया था कि लाखों परिवार एक साथ एसी चलाएंगे और गर्मी इतनी तेजी से बढ़ेगी। नतीजा यह है कि कई शहरों में स्थानीय ट्रांसफॉर्मर अपनी क्षमता से ज्यादा लोड झेल रहे हैं। सालाना डेढ़ करोड़ बढ़ रहे एसी कुछ साल पहले तक एयर कंडीशनर शहरी उच्च वर्ग की जरूरत माना जाता था। अब यह तेजी से मध्यम वर्ग के घरों तक पहुंच रहा है। 2019 से पहले भारत के केवल 10% घरों में एसी था। अब हर साल 1 से 1.5 करोड़ नए एसी बिक रहे हैं।
अगले दस वर्षों में देश में 13 से 15 करोड़ अतिरिक्त एसी लगने का अनुमान है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो 2030 तक केवल एसी ही देश की पीक बिजली मांग में 120 गीगावाट का योगदान देंगे। 2035 तक यह आंकड़ा 180 गीगावाट तक पहुंच सकता है। आज देश की पीक डिमांड में एसी का योगदान 60 से 70 गीगावाट तक माना जा रहा है। 70 फीसदी जिलों में भीषण गर्मी की पांच रातें ज्यादा देश में सिर्फ दिन ही नहीं, रातें भी तेजी से गर्म हो रही हैं। पिछले एक दशक में देश के करीब 70% जिलों में हर गर्मी के मौसम में कम से कम पांच अतिरिक्त गर्म रातें दर्ज की गईं। केवल 28% जिलों में पांच या उससे ज्यादा अतिरिक्त बेहद गर्म दिन रिकॉर्ड हुए।
