क्या फिर से बनेगी अरावली की परिभाषा? सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए किया हाई लेवल कमेटी का गठन
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और सीमांकन पर केंद्र की रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद की महानिदेशक कंचन देवी की अध्यक्षता वाली समिति को 31 अगस्त तक
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और सीमांकन पर केंद्र की रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद की महानिदेशक कंचन देवी की अध्यक्षता वाली समिति को 31 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। ये मामला अरावली पहाड़ियों की 100 मीटर की ऊंचाई के मापदंड विवाद से संबंधित है। गठित उच्च स्तरीय समिति के अन्य सदस्य भारतीय वन सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक डॉक्टर सुभाष आशुतोष, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक डॉक्टर राजेन्द्र कुमार शर्मा, पर्यावरण मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव बृजमोहन सिंह राठौर और दिल्ली विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अशोक के.
भटनागर शामिल हैं। इसके अलावा कोर्ट ने बंगलूरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट फार ह्यूमन सेटेलमेंट के प्रोफेसर जगदीश कृष्णस्वामी और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लक्ष्मीकांत शर्मा को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में नियुक्ति किया है। जिन्हें आवश्यकतानुसार अध्यक्ष द्वारा समिति के कार्य से जोड़ा जा सकता है। 2025 की रिपोर्ट से उत्पन्न सवालों की जांच इस उच्च स्तरीय समिति को अरावली पहाड़ियों की परिभाषा व अन्य मुद्दों से संबंधित 2025 की रिपोर्ट से उत्पन्न सवालों की जांच का काम सौंपा गया है। समिति इस बात का भी मूल्यांकन करेगी कि क्या मौजूदा नियामक तंत्रों में कोई महत्वपूर्ण कमियां हैं जिनके चलते अरावली की व्यापक वैज्ञानिक और भूवैज्ञानिक जांच जरूरी हो जाती है।
खबरें और भी साथ ही जांचेगी कि 100 मीटर या उससे अधिक की ऊंचाई वाली अरावली की पहाड़ियां, प्रस्तावित 500 मीटर की सीमा से अधिक दूरी पर स्थिति होने के बावजूद, एक सतत पारिस्थितिक संरचना का निर्माण करती हैं, और क्या ऐसी बीच की खाली जगहों में खनन गतिविधियों की अनुमति दी जानी चाहिए। अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर उठा विवाद मालूम हो कि अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और ऊंचाई के मानदंड को लेकर विवाद उठने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शुरू की थी।
कोर्ट ने 29 दिसंबर को पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा तैयार अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी।
