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बीमा कंपनियों के शीर्ष अधिकारी क्यों दे रहे इस्तीफा? TATA AIG से लेकर HDFC ERGO के सीईओ ने भी दिया रिजाइन

Published 3 June 2026 · finance

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में जीवन और साधारण बीमा कारोबार के लिए अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद बड़ी कंपनियों के सीईओ अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। इससे इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर इतने बड़े पदों पर आसीन लोग इस्तीफा क्यों दे रहे हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में जीवन और साधारण बीमा कारोबार के लिए अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद बड़ी कंपनियों के सीईओ अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। इससे इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर इतने बड़े पदों पर आसीन लोग इस्तीफा क्यों दे रहे हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण क्या है। कौन-कौन दे चुके हैं इस्तीफा? टाटा एआइजी जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और सीईओ नीलेश गर्ग एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और सीईओ अनुज त्यागी जनराली सेंट्रल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और सीईओ अनुप राव इस वजह से पद छोड़ रहे शीर्ष अधिकारी जानकारों का कहना है कि भारत अभी भी एक ऐसा बाजार है जहां बीमा की पहुंच काफी कम है।

इसी का फायदा उठाने के लिए इस सेक्टर के अनुभवी पेशेवेर जानी मानी संस्थाओं को छोड़कर प्राइवेट इक्विटी कंपनियों से फंडिंग सपोर्ट हासिल करके अपना कारोबार खड़ा कर रहे हैं। नीलेश गर्ग ने भी टाटा एआइजी को छोड़कर अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी फर्म वेस्टब्रिज के साथ मिलकर कीवी जनरल इंश्योरेंस की स्थापना की है। इसमें वेस्टब्रिज की करीब 70 प्रतिशत और नीलेश गर्ग की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बीमा नियामक इरडा ने मार्च 2026 में कीवी को बीमा कारोबार के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र दिया है। एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस छोड़ने वाले अनुज त्यागी ने भी अपनी उद्यमिता से जुड़ी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पद छोड़ा है।

उद्योग सूत्रों का कहना है कि राव बीमा क्षेत्र में एक नए वेंचर के विकल्प पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं, चाहे वह इक्विटी हिस्सेदारी के रूप में हो या संस्थापक साझेदार के तौर पर। आसान हुआ बीमा कारोबार करना बीमा नियामक इरडा ने हाल के वर्षों में बीमा कारोबार को लेकर कई सुधार किए हैं। इससे बीमा कारोबार करना आसान हो गया है और बीमा क्षेत्र निवेशकों के लिए ज्यादा अनुकूल बन गया है। इसके अलावा, सरकार भी बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआइ) को मंजूरी दे चुकी है।

निजी क्षेत्र की एक बीमा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इरडा ने नई कंपनियों के लिए खुलेपन का संकेत दिया है। इसके अलावा बीमा सुगम और यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) जैसी डिजिटल पहलों से ग्राहकों तक पहुंचने के तरीके में बदलाव आया है। खबरें और भी

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