Lucknow, India

FCI के खाद्यान्न की निगरानी बढ़ेगी, बोरियों पर 'क्यूआर टैग' लगेगा

Published 3 June 2026 · politics

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की अनाज की बोरियों पर क्यूआर टैग लगाने की पहल का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया है। इसका मकसद एफसीआई के खाद्यान्न की निगरानी को और सुदृढ़ करना है। चालू मार्केटिंग सत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की अनाज की बोरियों पर क्यूआर टैग लगाने की पहल का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया है। इसका मकसद एफसीआई के खाद्यान्न की निगरानी को और सुदृढ़ करना है। चालू मार्केटिंग सत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में इस प्रणाली को लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत मिलों से वितरण केंद्रों तक भेजे जाने वाले 20 लाख टन चावल को क्यूआर टैगिंग के दायरे में लाया जाएगा।

खाद्यान्न की आवाजाही पर निगरानी रखने और अनाज की बोरियों के पुन: उपयोग पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। आंध्र प्रदेश में दिसंबर 2025-जनवरी 2026 और पंजाब में अप्रैल-मई 2026 के दौरान सफल पायलट परियोजना के बाद यह फैसला लिया गया है। आंध्र प्रदेश में मिलों से वितरण वाले राज्यों में लगभग 10 लाख टन चावल क्यूआर टैगिंग के साथ भेजा जाएगा, जबकि तेलंगाना और ओडिशा से पांच-पांच लाख टन चावल भेजा जाएगा।

खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- 'हम खरीद करने वाले राज्यों से वितरण करने वाले प्रदेशों तक भेजे जाने वाली खाद्यान्न की बोरियों पर क्यूआर टैग लगाने की योजना बना रहे हैं।' इस विस्तारित पायलट परियोजना में तीनों राज्यों के चुनिंदा जिलों को शामिल किया जाएगा। खबरें और भी क्यूआर टैगिंग प्रणाली अधिकारियों को प्रत्येक बोरी के स्रोत का पता लगाने में सक्षम बनाती है कि इसे किस खरीद केंद्र से लिया गया, किस एजेंसी ने इसकी खरीद की और यह किस सत्र का है।

गोदामों में भंडारण के दौरान और बाद में वितरण के समय उचित दर की दुकानों (राशन दुकानों) पर इन बोरियों को ‘स्कैन’ किया जाता है। वितरण चरण में ईपीओएस उपकरण क्यूआर कोड को दर्ज करेगा, जिससे सब्सिडी वितरण प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकेगा।

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