Lucknow, India

प्रयोग या संयोग... तमिलनाडु में साइडलाइन किए गए अन्नामलाई भाजपा से कैसे हो गए दूर?

Published 3 June 2026 · india

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु भाजपा के सबसे चर्चित और आक्रामक चेहरों में शामिल रहे के. अन्नामलाई ने आखिरकार भारतीय जनता पार्टी से अलग होने का फैसला कर लिया है। कभी तमिलनाडु में भाजपा की सबसे बड़ी उम्मीद माने जाने वाले पूर्व IPS अधिकारी अब अपनी नई क्षेत्रीय पार्टी बनाने

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु भाजपा के सबसे चर्चित और आक्रामक चेहरों में शामिल रहे के. अन्नामलाई ने आखिरकार भारतीय जनता पार्टी से अलग होने का फैसला कर लिया है। कभी तमिलनाडु में भाजपा की सबसे बड़ी उम्मीद माने जाने वाले पूर्व IPS अधिकारी अब अपनी नई क्षेत्रीय पार्टी बनाने की तैयारी में हैं। नई पार्टी बनाएंगे अन्नामलाई? सूत्रों के मुताबिक अन्नामलाई ने दिल्ली पहुंचकर भाजपा नेतृत्व, खासकर गृह मंत्री अमित शाह समेत शीर्ष नेताओं को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि औपचारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन उनके करीबी साफ संकेत दे रहे हैं कि वह अब अपनी राजनीतिक राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि अन्नामलाई ने भाजपा नेतृत्व को एक विस्तृत रिपोर्ट भी सौंपी है, जिसमें उन्होंने 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पार्टी की विफलता और खुद को “साइडलाइन” किए जाने की बात रखी है। कैसे शुरू हुआ अन्नामलाई का सफर? के. अन्नामलाई ने मई 2019 में IPS सेवा छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने 'We The Leader Foundation' नाम से सामाजिक कार्य शुरू किया।

राजनीति में आने की उनकी पहली पसंद भाजपा नहीं, बल्कि अभिनेता रजनीकांत थे। लेकिन जब रजनीकांत की राजनीतिक योजना आगे नहीं बढ़ी, तब अन्नामलाई ने 2020 में भाजपा का दामन थाम लिया। 2021 विधानसभा चुनाव में वह अरवाकुरिची सीट से हार गए, लेकिन पश्चिम तमिलनाडु में भाजपा को दो सीटें दिलाने में अहम भूमिका निभाई। भाजपा को मिला नया 'सिंघम' भाजपा नेतृत्व ने अन्नामलाई की लोकप्रियता और आक्रामक शैली को जल्दी पहचान लिया। महज एक साल के भीतर उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। इसके बाद अन्नामलाई ने 2023 में अपनी चर्चित 'एन मन्न, एन मक्कल' (मेरी धरती, मेरे लोग) पदयात्रा निकाली, जिसने तमिलनाडु में भाजपा की मौजूदगी को नई पहचान दी। यह पदयात्रा 200 दिनों तक चली और राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों को कवर किया। इसकी शुरुआत अमित शाह ने की थी, जबकि समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल रैली के साथ हुआ। अन्नामलाई की सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान द्रविड़ राजनीति पर खुला हमला DMK और AIADMK दोनों की आलोचना तमिलनाडु में भाजपा की अलग पहचान बनाने की कोशिश अन्नामलाई की इसी आक्रामक राजनीति ने AIADMK और भाजपा के रिश्तों में तनाव पैदा किया।

2024 लोकसभा चुनाव में अन्नामलाई के नेतृत्व में भाजपा का वोट शेयर तमिलनाडु में रिकॉर्ड 11.38% तक पहुंच गया। 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर: 3.62% वोट 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर: 5.56% वोट और 1 सीट हालांकि वोट शेयर में भारी बढ़ोतरी के बावजूद भाजपा एक भी सीट नहीं जीत सकी। यही वह मोड़ था जहां पार्टी नेतृत्व ने अपनी रणनीति पर दोबारा विचार शुरू किया। AIADMK से दोबारा गठबंधन और अन्नामलाई से दूरी 2026 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने AIADMK के साथ फिर गठबंधन कर लिया। यह फैसला अन्नामलाई की सोच के बिल्कुल खिलाफ माना गया। सूत्रों के मुताबिक AIADMK ने साफ शर्त रखी थी कि अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाए और उम्मीदवार चयन में उनकी भूमिका खत्म की जाए। भाजपा ने भी गठबंधन बचाने के लिए यह शर्तें मान लीं। इसके बाद अन्नामलाई पूरी तरह हाशिये पर चले गए। उन्होंने 2026 विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ा। चुनाव परिणाम से क्या साबित हुआ? 4 मई 2026 को आए चुनाव नतीजों में AIADMK-BJP गठबंधन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।

भाजपा को सिर्फ 1 सीट मिली। दिलचस्प बात यह रही कि 2021 में भाजपा ने 4 सीटें जीती थीं, तब पार्टी का वोट शेयर 2.62% था। वहीं 2026 में वोट शेयर थोड़ा बढ़कर 2.99% हुआ, लेकिन सीटे घटकर सिर्फ 1 रह गई। इसके बाद पार्टी के भीतर यह सवाल उठने लगा कि क्या भाजपा ने अन्नामलाई वाला नया प्रयोग बहुत जल्दी छोड़ दिया? खबरें और भी पहली बार खुलकर केंद्र सरकार के खिलाफ बोले अन्नामलाई अन्नामलाई की नाराजगी पहली बार सार्वजनिक रूप से तब दिखी जब उन्होंने CBSE की नई तीन-भाषा नीति पर केंद्र सरकार की आलोचना की। 15 मई को CBSE ने कक्षा 9 से तीन भाषाएं अनिवार्य करने का नोटिफिकेशन जारी किया था। इस पर अन्नामलाई ने X पर लिखा, 'तमिलनाडु के कई अभिभावकों के लिए यह चौंकाने वाला फैसला है। इतने कम समय में छात्रों पर नई भाषा थोपना उनके सीखने की क्षमता को प्रभावित करेगा।'

Read full story on TheBriefWire

Loading…