Lucknow, India

कुत्तों और एआई का उपयोग कर कैंसर का पता लगा रही बेंगलुरु की कंपनी, सस्ती, सटीक जांच का दावा

Published 3 June 2026 · tech

एएनआई, बेंगलुरु। कुत्तों की सूंघने की अद्भुत क्षमता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का उपयोग कर बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी कैंसर का प्रारंभिक चरण में पता लगाने में मदद कर रही है। इस तकनीक से कैंसर की बेहद सस्ती, सटीक और दर्दरहित जांच संभव हो सकती है। कंपनी का दावा

एएनआई, बेंगलुरु। कुत्तों की सूंघने की अद्भुत क्षमता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का उपयोग कर बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी कैंसर का प्रारंभिक चरण में पता लगाने में मदद कर रही है। इस तकनीक से कैंसर की बेहद सस्ती, सटीक और दर्दरहित जांच संभव हो सकती है। कंपनी का दावा है कि पिछले दो वर्षों में दूसरे चरण के परीक्षण के दौरान लगभग 1,500 लोगों पर परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में तकनीक 90 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पकड़ने में सफल रही। डॉगनोसिस नामक स्टार्टअप कंपनी कुत्तों की असाधारण सूंघने की क्षमता और एआई-संचालित विश्लेषण के साथ कैंसर से जुड़े रासायनिक यौगिकों की पहचान कर रही है।

इस परियोजना से जुड़े डाक्टरों का कहना है कि शुरुआती परीक्षणों में इस तकनीक ने आशाजनक परिणाम दिखाए हैं। कैंसर विशेषज्ञ डा. स्वरातिका मजूमदार ने कहा, यह कैंसर का पता लगाने का प्रारंभिक, आसान और सस्ता तरीका है। यदि किसी को कैंसर है, तो कुत्ते लगभग 90 प्रतिशत मामलों में इसकी पहचान करने में सक्षम हैं। इस प्रक्रिया में मरीजों को 10 मिनट के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए मास्क में सांस लेने को कहा जाता है, जिससे उनकी सांस में मौजूद वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी) इकट्ठे हो जाते हैं। इसके बाद नमूनों को प्रयोगशाला में लाया जाता है, जहां विशेष रूप से प्रशिक्षित कुत्ते सेंसर और निगरानी प्रणालियों से सुसज्जित नियंत्रित परीक्षण सेटअप के अंदर सांस के नमूनों को सूंघते हैं।

डॉगनोसिस के सीईओ आकाश कुलगोद के अनुसार कुत्तों को गंध के माध्यम से रोग से संबंधित वीओसी संकेतों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। उन्होंने कहा, मास्क में वीओसी होते हैं, जो मूल रूप से यह संकेत देते हैं कि किसी व्यक्ति को कोई बीमारी है या नहीं। खबरें और भी मास्क को प्रयोगशाला में लाया जाता है, जहां प्रशिक्षित कुत्तों की टीम इनका मूल्यांकन करती है और इन यौगिकों की सटीक पहचान करती है। कुत्तों की प्रतिक्रियाओं को सेंसर के माध्यम से रिकार्ड किया जाता है और एआइ-आधारित एल्गोरिदम का उपयोग करके उनका विश्लेषण किया जाता है।

डॉगनोसिस की आफिस एसोसिएट सृष्टि ने कहा, यह इस बात का प्रमाण है कि सांस की जांच से ही कैंसर का प्रारंभिक चरण में पता लगाया जा सकता है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि भारत में विकसित तकनीक वैश्विक स्तर पर कैंसर का शीघ्र पता लगाने में योगदान दे सकती है।

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