Lucknow, India

'कॉकरोच से लेकर परजीवियों तक', ऑनलाइन की दुनिया में चल रहे शब्दों की नई अंडरग्राउंड लड़ाई के पीछे की कहानी

Published 20 May 2026 · politics

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों दो पार्टी का नाम तेजी से उभर रहा है। इनमें से एक है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और दूसरा है नेशनल पैरासिटिक फ्रंट (NPF), ये दो व्यंग्यात्मक राजनीतिक संगठन हैं जो ऑनलाइन दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए है। अगर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों दो पार्टी का नाम तेजी से उभर रहा है। इनमें से एक है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और दूसरा है नेशनल पैरासिटिक फ्रंट (NPF), ये दो व्यंग्यात्मक राजनीतिक संगठन हैं जो ऑनलाइन दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए है। अगर साफ तौर पर कहें तो, ये दोनों संगठन खुद को व्यंग्य बताते हैं, लेकिन सभी बेहतरीन भारतीय राजनीतिक व्यंग्यों की तरह, इनके मजाक इसलिए असरदार लग रहे हैं क्योंकि इनके पीछे की कहानी असली हैं। यह चर्चा तब शुरू हुई जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से की थी। इसके बाद मानो इंटरनेट पर व्यंग्य की बाढ़ आ गई। इसके साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी का उदय हुआ। जो कि खुद को आलसियों और बेरोजगारों की आवाज बताती है, जिसका मुख्यालय जहां भी इंटरनेट है, वहीं है।

ऑनलाइन की दुनिया में 16 मई को आया CJP इसकी आधिकारिक वेबसाइट किसी राजनीतिक पोर्टल जैसी कम, और किसी Gen-Z स्टैंड अप कॉमेडियन के सेट जैसी ज्यादा लगती है, जो एक चुनावी घोषणापत्र का रूप लिए हुए है। जानकारी के अनुसार, अभिजीत दिपके ने CJP को 16 मई को ऑनलाइन की दुनिया में इसे लॉन्च किया था। इसके बाद यह नाम तेजी से X और इंस्टाग्राम पर छा गई। पार्टी ने कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर दस लाख से ज्यादा फॉलोअर्स बना लिए, और इस तरह जो बात एक इंटरनेट मजाक के तौर पर शुरू हुई थी, वह एक वायरल राजनीतिक घटना बन गई। दिपके कहते हैं कि लोगों की प्रतिक्रिया उनकी मूल कल्पना से कहीं ज्यादा जबरदस्त रही। उन्होंने बताया कि विवाद के बाद एक अचानक सूझे ऑनलाइन मजाक के तौर पर जो बात शुरू हुई थी, वह अब महज एक मजाक से कहीं आगे निकल चुकी है।

खबरें और भी हालांकि, पार्टी की वेबसाइट खुले तौर पर यह स्वीकार करती है कि यह प्रोजेक्ट एक व्यंग्य है, लेकिन इसका मजाकिया घोषणापत्र बड़ी ही होशियारी से असली राजनीतिक चिंताओं को दर्शाता है। इसके साथ ही CJP की अपनी एक वैचारिक ब्रांडिंग है। इसके समर्थक खुद को बेरोजगारी, महंगाई, प्रवेश परीक्षाओं, लिंक्डइन पर आने वाली मोटिवेशनल पोस्ट्स और उन रिश्तेदारों से जूझकर बचे हुए मजबूत लोगों के तौर पर पेश करते हैं, जो अक्सर पूछते हैं, बेटा आजकल क्या कर रहे हो? फिर हुई नेशनल पैरासिटिक फ्रंट की एंट्री CJP के बाद एंट्री हुई नेशनल पैरासिटिक फ्रंट की, एक तरफ CJP आलसी और बेरोजगार लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, तो दूसरी तरफ नेशनल पैरासिटिक फ्रंट उस अपमान के दूसरे हिस्से को दिखाने का काम करता है। NPF की ऑनलाइन मौजूदगी गंभीर राजनीतिक संगठनों के अंदाज की नकल करती है, लेकिन साथ ही बेतुकी बातों को और भी आगे ले जाती है।

अगर आसान भाषा में कहा जाए तो यह फ्रंट, बढ़ा-चढ़ाकर कही गई क्रांतिकारी भाषा को व्यंग्यात्मक के रूप में इस्तेमाल करता है। इसकी वेबसाइट पर यह भी बताया गया है कि यह नाम जान-बूझकर रखा गया है। वेबसाइट कहती है, "हम खुद को एक टूटी हुई व्यवस्था से जोड़ते हैं, ताकि उससे फायदा न उठा सकें, बल्कि उसे अंदर से बदलने के लिए मजबूर कर सकें।" कुल मिलाकर, इन दोनों समूहों ने मिलकर भारत में गठबंधन का अब तक का सबसे अजीब दौर खड़ा कर दिया है।

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